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भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते से क्या सस्ता होगा? कीवी और सेब की कीमतों पर जानें असर

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नई दिल्‍ली
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) आज यानी 20 अक्टूबर से प्रभावी हो जाएगा. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लागू होने से दोनों देशों के कारोबारियों को नया बाजार मिलेगा. इससे नए रोजगार के मौके भी सृजित होंगे. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से 100 प्रतिशत भारतीय निर्यात ड्यूटी फ्री हो जाएगा. गोयल के अनुसार, इस एफटीए से भारत के किसानों को फल, सब्जियों, मसालों और अन्य कृषि उत्पादों के लिए व्यापक बाजार तक पहुंच मिलेगी. इस नए व्यापारिक कदम के बाद क्‍या भारतीय उपभोक्ताओं को न्यूजीलैंड से आने वाले बेहतरीन क्वालिटी के कीवी और सेब सस्ते मिलेंगे?

समझौते की शर्तों के मुताबिक, आम उपभोक्ताओं को सस्ते कीवी और सेब के लिए अभी कम से कम एक साल का इंतजार करना पड़ेगा. वाणिज्य मंत्रालय ने सेब, कीवी और प्रसिद्ध मानुका शहद जैसे उत्पादों के आयात के लिए रियायती शुल्क-आधारित कोटा आवंटन की प्रक्रिया तय कर दी है. विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के जरिए जारी सार्वजनिक नोटिस में बताया गया है कि समझौते के पहले साल में सेब और कीवी दोनों के लिए कोई रियायती कोटा निर्धारित नहीं किया गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि मौजूदा वित्त वर्ष में इन फलों के दाम कम होने के कोई चांस नहीं है। 

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दूसरे साल से जीरो ड्यूटी पर मिलेगा कीवी
समझौता लागू होने के दूसरे साल से न्यूजीलैंड के कीवी पर आयात शुल्क पूरी तरह हटा दिया जाएगा और यह शुल्क-मुक्त आयात के दायरे में आ जाएगा. इसके लिए दूसरे साल 8,000 टन का कोटा तय किया गया है, जो तीसरे साल 9,750 टन, चौथे साल 11,500 टन और पांचवें साल 13,250 टन तक पहुंचेगा, जबकि छठे साल से यह सीमा सालाना 15,000 टन हो जाएगी. हालांकि, इस टैक्स छूट का लाभ तभी मिलेगा जब कीवी का लागत, बीमा और माल ढुलाई मूल्य कम से कम 1.80 डॉलर प्रति किलोग्राम हो. कुल मिलाकर दूसरे साल से भारतीय बाजारों में प्रीमियम कीवी की सप्लाई बढ़ेगी और शुल्क हटने के कारण इसकी खुदरा कीमतों में नरमी आ सकती है। 

सेब पर आधा होगा आयात शुल्क, पर शर्तें भी लागू
सेब के मामले में भी दूसरे साल से ही थोड़ी राहत मिलेगी. वर्तमान में भारत में विदेशी सेब के आयात पर 50 फीसदी तक शुल्क वसूला जाता है. भारत-न्‍यूजीलैंड व्‍यापार समझौते के तहत दूसरे साल से सेब पर आयात शुल्‍क 25 फीसदी कर दिया जाएगा. ऐसा नहीं कि न्‍यूजीलैंड भारी मात्रा में सेब निर्यात कर सकेगा. दूसरे साल में 35,000 टन रियायती सेब मंगाने की अनुमति होगी. इसे बढाते हुए छठे साल तक सालाना 45,000 टन कर दिया जाएगा. आयात शुल्क 50% से घटकर 25% होने के कारण न्यूजीलैंड के सेब के दाम भारतीय बाजारों में घट जाएंगे। 

घरेलू किसानों की सुरक्षा के लिए तय हुई सख्त सीमा
सेब की सस्ती दरों के साथ-साथ सरकार ने देश के बागवानों और किसानों के हितों की रक्षा का पूरा ख्याल रखा है. आयातित सेब के लिए न्यूनतम 1.25 डॉलर प्रति किलोग्राम का सीआईएफ मूल्य तय किया गया है, ताकि विदेशी सेब घरेलू बाजार में बहुत औने-पौने दामों पर न बिक सके। 

शहद और एल्ब्यूमिन के बाजार पर भी दिखेगा असर
समझौते के दायरे में सिर्फ फल ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए मशहूर मानुका शहद और प्रोटीन उत्पाद एल्ब्यूमिन भी शामिल हैं. एल्ब्यूमिन पर 11 फीसदी रियायती शुल्क लगेगा और इसका कोटा पहले साल 200 टन से शुरू होकर पांचवें साल तक 3,000 टन सालाना पहुंचेगा. वहीं मानुका शहद के लिए पहले साल 40 टन और दूसरे साल से आगे सालाना 200 टन का कोटा रहेगा। 

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