Home राज्य ‘मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं, हक के लिए लड़ने वाली कौम...

‘मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं, हक के लिए लड़ने वाली कौम हैं’… संजय निषाद का दो टूक संदेश

6
0
Jeevan Ayurveda

‘साढ़े चार साल सुख-दुख में नहीं आए, अब पंचायत के बहाने कूद रहे बरसाती मेंढक’… संजय निषाद का तीखा हमला

‘फूलन देवी की हत्या करवाकर मछुआरा समाज की राजनीति रोकी’… संजय निषाद का परोक्ष रूप से सपा पर तीखा हमला 

Ad

‘मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं, हक के लिए लड़ने वाली कौम हैं’… संजय निषाद का दो टूक संदेश

‘भेष बदल-बदलकर आएंगे बरसाती मेंढक, उनसे सावधान रहना है’… संजय निषाद ने मछुआरा समाज को चेताया

लखनऊ
 उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने आगामी चुनाव को देखते हुए शुक्रवार को मछुआरा समाज को सावधान करते हुए तीखा सोशल मीडिया पोस्ट किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग साढ़े चार साल तक समाज के सुख-दुख में दिखाई नहीं दिए, वही अब पंचायत के बहाने मछुआरा समाज के आसपास नजर आने लगे हैं। संजय निषाद ने परोक्ष रूप से समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए ऐसे लोगों को ‘बरसाती मेंढक’ और ‘दरी बिछाने वाले सौदागर’ बताते हुए समाज से सतर्क रहने की अपील की। 

‘साढ़े चार साल नहीं आए, अब पंचायत के बहाने कूदने लगे’

संजय निषाद ने मल्लाह, निषाद, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर, कहार, बाथम, रायकवार और माझी समेत पूरे मछुआरा समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि चुनावी मौसम में ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा, जो लंबे समय तक समाज के बीच नहीं रहे और अब पंचायत के बहाने उसके आसपास सक्रिय होने लगे हैं।

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि 'जो साढ़े चार साल आपके सुख-दुख में नहीं आए- अब दरी बिछाने वाले वही सौदागर पंचायत के बहाने आपके आसपास बरसाती मेंढक की तरह कूदने लगे हैं।'

फूलन देवी की हत्या और राजनीतिक विरासत का मुद्दा

संजय निषाद ने अपने पोस्ट में वीरांगना फूलन देवी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने फूलन देवी की हत्या करवाकर मछुआरा समाज की अलग राजनीति को खड़ा होने से रोकने का काम किया, उनसे और उनकी मदद करने वालों से समाज को सावधान रहना होगा।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जिस पार्टी ने फूलन देवी की हत्या की सुपारी दी, उनकी संपत्ति पर कब्जा कर लिया और उनकी राजनीतिक विरासत को मछुआरा समुदाय से छीनने का प्रयास किया, ऐसे लोग मछुआरा समाज का भला चाहने वाले नहीं हो सकते।

दरअसल, फूलन देवी की हत्या को लेकर संजय निषाद सपा पर निशाना साधते रहे हैं। उनका दावा है कि फूलन देवी की बढ़ती लोकप्रियता देखकर सपा ने उनके खिलाफ साजिश की थी।

‘मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं’

संजय निषाद ने अपने पोस्ट में मछुआरा समाज की राजनीतिक पहचान को लेकर भी दो टूक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 'मछुआरों की अब स्वतंत्र पहचान निषाद पार्टी हैं।' उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं हैं, बल्कि ओबीसी समाज के हक के लिए लड़ने वाली कौम हैं।

उनका संदेश था कि समाज को चुनावी मौसम में आने वाले ऐसे चेहरों को पहचानना होगा, जो अलग-अलग रूप और भेष में उसके बीच पहुंचेंगे। संजय निषाद ने लिखा, 'बरसाती मेंढक भेष बदल-बदल के आएंगे। उनसे सावधान रहना है।'

‘समाज को अपने हक के लिए खड़ा होना होगा’

संजय निषाद के इस पूरे पोस्ट में मछुआरा समाज की राजनीतिक पहचान, उसके अधिकार और अलग राजनीतिक ताकत के तौर पर खड़े होने का संदेश प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने समाज को आगाह किया कि चुनावी मौसम में आने वाले राजनीतिक सौदागरों के बहकावे में आने के बजाय अपने हित और अधिकारों को प्राथमिकता देनी होगी।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here