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शादीशुदा या तलाकशुदा बेटी को अनुकंपा नौकरी से वंचित करना गलत, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

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बिलासपुर
 छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि सिर्फ वैवाहिक स्थिति के आधार पर बेटी को नियुक्ति के विचार से बाहर नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि तलाकशुदा बेटी द्वारा तलाक से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने के आधार पर उसके अनुकंपा नियुक्ति के दावे को खारिज करना उचित नहीं है।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जल संसाधन विभाग के अस्वीकृति आदेश को निरस्त करते हुए महिला के आवेदन पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है। इसके लिए अधिकारियों को 40 दिन की समय-सीमा दी गई है।

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पिता की मृत्यु के बाद किया था आवेदन
यह आदेश जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने तीजिया बाई यादव विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य मामले में सुनाया। याचिकाकर्ता तीजिया बाई यादव पति भरत यादव, उम्र करीब 42 वर्ष, निवासी नवागांव तखतपुर के पिता स्वर्गीय पिल्लू राम यादव जल संसाधन विभाग में चौकीदार के पद पर कार्यरत थे। सेवा में रहते हुए 26 अगस्त 2024 को उनका निधन हो गया।

पिता की मृत्यु के बाद तीजिया बाई यादव ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। सक्षम अधिकारी ने आवेदन पर विचार करने के बाद दो जुलाई 2025 को आदेश जारी कर उनका दावा खारिज कर दिया। अस्वीकृति का प्रमुख आधार यह था कि आवेदन के साथ तलाक से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए थे।

शादी के आधार पर बेटी को नहीं कर सकते बाहर
हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एफएस खरे ने दलील दी कि केवल वैवाहिक स्थिति अथवा तलाक का दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर विचार करने से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने हाई कोर्ट के 30 नवंबर 2015 के पूर्व निर्णय का भी हवाला दिया।

इस फैसले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल शादीशुदा होने के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के विचार से बाहर करना संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। अदालत ने नीति के उन प्रावधानों को असंवैधानिक माना था, जिनके तहत सिर्फ विवाह के आधार पर विवाहित बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के लिए विचार से बाहर किया जाता था।

सरकार ने भी माना, 2015 का फैसला लागू
राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता केजी यादव ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सक्षम अधिकारी ने उपलब्ध दस्तावेजों और लागू नीति के आधार पर आदेश पारित किया था। हालांकि, उन्होंने इस बात का विरोध नहीं किया कि वर्तमान मामले में उठाया गया कानूनी प्रश्न हाई कोर्ट के 30 नवंबर 2015 के फैसले से कवर होता है।

इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने जल संसाधन विभाग के दो जुलाई 2025 के अस्वीकृति आदेश को रद्द कर दिया और संबंधित अधिकारियों को तीजिया बाई यादव के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर कानून के अनुसार नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया।

 

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