Home राज्य आधुनिक सोच और तकनीक से युवाओं ने कांवड़ को बनाया चलती-फिरती कहानी

आधुनिक सोच और तकनीक से युवाओं ने कांवड़ को बनाया चलती-फिरती कहानी

4
0
Jeevan Ayurveda

जेन-जी की क्रिएटिविटी ने कांवड़ में भरे आस्था संग इतिहास और समाज के रंग

 पौराणिक मान्यताओं संग विज्ञान और गुमनाम शहीदों के नाम पर सजी झांकियां

Ad

 आधुनिक सोच और तकनीक से युवाओं ने कांवड़ को बनाया चलती-फिरती कहानी

मेरठ
 कांवड़ यात्रा अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर मेरठ के रास्ते अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे शिवभक्तों के कदमों के साथ सड़कों पर आस्था के अनगिनत रंग दिखाई दे रहे हैं। इनमें सबसे खास है जेन-जी की क्रिएटिविटी। नई पीढ़ी ने कुछ वर्षों में कांवड़ के ट्रेंड को बदल दिया है। युवाओं ने अपनी सोच और तकनीक के माध्यम से बड़ी कांवड़ों के रूप में सनातन संस्कृति, भारतीय इतिहास और सामाजिक संदेशों के चलते-फिरते मंच प्रस्तुत किए हैं। इन कांवड़ों के निर्माण में युवाओं ने 25 लाख तक की धनराशि खर्च करने में संकोच नहीं किया।

योगी सरकार में कांवड़ मार्गों पर की गई व्यवस्था ने श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया है। विशाल और आकर्षक कांवड़ें राहगीरों को मोह ले रही हैं। इन कांवड़ों में आस्था और तकनीक के संयोजन से विभिन्न पौराणिक मान्यताओं को दर्शाया गया है। भगवान शिव के रौद्र रूप, नटराज स्वरूप, तांडव नृत्य, देवी पार्वती के मां काली का रूप धारण करने की झांकियों के साथ ही रूद्र अवतार हनुमान की विभिन्न झांकियां लोगों को बहुत पंसद आई।

– आस्था से विज्ञान और समाज के रंग
कांवड़ पथ से शिव भक्ति का संदेश देती केदारनाथ की प्रतिकृति ने आस्था के रंग प्रस्तुत किए तो भारत माता की कांवड़, अग्नि 5 की प्रतिकृति वाली कांवड़ों ने देशभक्ति और विज्ञान के विभिन्न रूप दिखाए। इस दौरान वुडन, चारकोल और अन्य सामग्री से तैयार बड़ी कांवड़ों में समाज के विभिन्न रूप दिखाई दिए। कई तीर्थ स्थलों की झांकी को इतना जीवंत बनाया गया था कि कांवड़ मार्ग से गुजरने वाले लोग उसे देखने के लिए रुक जाते हैं। 

– इतिहास में गुम हुए शहीद भी बने बड़ी कांवड़ों का हिस्सा
जेन-जी की कांवड़ों की खासियत केवल धार्मिक स्वरूप तक सीमित नहीं है। युवाओं ने भारतीय इतिहास में गुम हो चुके शहीदों को भी अपनी झांकी का हिस्सा बनाया। दिल्ली के करोलबाग की एक झांकी 1857 के जननायक मातादीन वाल्मीकि को समर्पित रहीं। वहीं एक झांकी में दिल्ली के तिगरी निवासी युवाओं ने भगवान शिव के साथ दादा सबल सिंह और दादा केसर सिंह की जीवन गाथा को उकेरा। इस झांकी का निर्माण 25 सदस्यीय वाल्मीकि युवा शक्ति ग्रुप ने किया था।

आस्था संग पर्यावरण की अलख जगाई
कई युवाओं ने अपनी कांवड़ों में पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का संदेश भी शामिल किया है। दिल्ली निवासी सोनू ने अपनी 225 किमी की यात्रा पर्यावरण को समर्पित की। वह हरिद्वार से गंगाजल के साथ 1100 पौधे लेकर चले और दिल्ली तक सभी पौधों का वितरण भोले के प्रसाद के रूप में लोगों किया। उन्होंने पर्यावरण का संदेश देने के लिए अपने वाहन और अपनी वेशभूषा को ग्रीन ग्रास के रूप में परिवर्तित कर दिया।
इन कांवड़ों के निर्माण में युवाओं ने 25 लाख तक की धनराशि खर्च की।  जेन-जी के युवाओं की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि नई पीढ़ी तकनीक और आधुनिक जीवनशैली के बीच भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी है। कांवड़ मार्ग पर दिखाई दे रही ये अनूठी कांवड़ें केवल आकर्षण नहीं, बल्कि बदलते भारत में आस्था के नए स्वरूप की कहानी भी कह रही हैं।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here