भोपाल
मप्र जन अभियान परिषद और नर्मदा समग्र के संयुक्त तत्वावधान में रेवा सेवा समागम अंतर्गत परिषद के राज्य कार्यालय में आगामी 09, 16 और 23 अगस्त 2026 को होने वाली नर्मदा तटीय 16 जिलों में जिला स्तरीय कार्यशालाओं में नर्मदा नदी के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये मंथन किया गया।
परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर ने कहा कि नर्मदा नदी युगों-युगो से इस धरा पर जीवकोपार्जन करती आ रही है और इसके प्रमाण हैं हमारे पुराण, हमारे पूर्वज, हमारी श्रद्धाएं और हमारी परंपराएं। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी को संरक्षित और संवर्धन करने के लिए समाज को संस्कारित करना होगा। पिछले 4-5 दशकों में आधुनिक विकास ने पुरातन परंपराओं को प्रभावित किया है। जिसके कारण परंपराओं का क्षरण हुआ है।
वरिष्ठ समाजसेवी बृजकिशोर भार्गव ने कहा कि नर्मदा नदी का आध्यात्मिक एवं आर्थिक महत्व है। लेकिन नर्मदा के तटीय गांवों में श्रद्धा-भक्ति कोरी दिखाई देने लगी है। यह सच है कि नर्मदा को माँ मानने वाले लोग हिन्दू संस्कृति के लोग हैं। आवश्यकता इस बात की है कि नर्मदा के संरक्षण और संवर्धन के लिये आगे आयें। इस के लिये जनमानस बनाने की जरूरत है। मप्र जन अभियान परिषद और उससे जुड़ी संस्थाएं नदियों के संरक्षण पर कार्य कर रही हैं। इसमें आमजनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड़ ने कहा कि मप्र जन अभियान परिषद 2009 से नदियों के संरक्षण एवं संवर्धन पर कार्य कर रही है। प्रदेश भर में परिषद का सशक्त नेटवर्क फैला है और जनभागीदारी एवं जन सहभागिता से कार्य कर रही है। आगामी दिनों में होने वाली कार्यशालाओं में ऐसे समाजसेवियों का चिंहांकन करना है जो नर्मदा नदी का संरक्षण में जन सहभागिता सुनिश्चित कर सकें। नर्मदा समग्र के कार्यपालक निदेशक कार्तिक सप्रे ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि आगामी समय में होने वाली कार्यशालाओं में हमें नर्मदा नदी एवं सहायक नदियों का संरक्षण, प्राकृतिक कृषि एवं जैविक कृषि, घाट संस्कृति एवं घाट संरक्षण और नर्मदा पथ एवं नर्मदा परिक्रमा पर कार्य करना है। इस अवसर पर परिषद के सलाहकार करन कौशिक ने भी कार्यशाला को संबोधित किया और मार्गदर्शन दिया। कार्यशाला में नर्मदा तटीय संभाग/जिला समन्वयक सहित राज्य कार्यालय के अधिकारी उपरिस्थत रहे।









