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रिकॉर्ड खरीदी के बावजूद बस्तर में घटे संग्राहक, 50 हजार लोगों ने तेंदूपत्ता संग्रहण से बनाई दूरी

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जगदलपुर.

बस्तर संभाग में इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण को लेकर रिकॉर्ड आंकड़े सामने आए हैं। वन विभाग ने दावा किया है कि जगदलपुर सर्किल के चार जिलों में 1 लाख 74 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता खरीदा गया है, जिससे करीब 96 करोड़ रुपये की राशि संग्राहकों तक पहुंची है। हालांकि इन दावों के बीच कई ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जो तेंदूपत्ता कारोबार की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

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आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में लगभग 1 लाख 75 हजार संग्राहक पंजीकृत हैं, लेकिन तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में केवल 1 लाख 25 हजार लोग ही शामिल हुए। यानी करीब 50 हजार पंजीकृत संग्राहकों ने इस बार तेंदूपत्ता तोड़ने का काम नहीं किया। इतनी बड़ी संख्या में संग्राहकों के प्रक्रिया से बाहर रहने के पीछे के कारणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर मजदूरी, मौसम और संग्रहण से जुड़ी अन्य चुनौतियों को इसकी एक वजह माना जा रहा है।

वन विभाग ने भी माना है कि बेमौसम बारिश का असर संग्रहण पर पड़ा। बारिश के कारण 60 से 70 गांवों में तेंदूपत्ता संग्रहण प्रभावित हुआ। अधिकारियों का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल रहता तो खरीदी और संग्रहण का आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता था। इसके अलावा 1702 फड़ों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 1600 फड़ों में ही संग्रहण कार्य हो पाया, जिससे कई इलाकों में व्यवस्था संबंधी चुनौतियां भी उजागर हुई हैं।

अवैध कारोबार ने भी बढ़ाई प्रशासन की चिंता
इस बीच तेंदूपत्ता के अवैध कारोबार ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सुकमा-ओडिशा सीमा क्षेत्र में वन विभाग ने 12 अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर लाखों रुपये मूल्य का तेंदूपत्ता जब्त किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तेंदूपत्ता को अवैध रूप से ओडिशा और तेलंगाना की ओर खपाने की कोशिश की जा रही थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह संकेत मिल रहा है कि तेंदूपत्ता व्यापार में तस्करी का नेटवर्क अब भी सक्रिय है।

बस्तर में तेंदूपत्ता ग्रामीण और वन आश्रित परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत माना जाता है। ऐसे में रिकॉर्ड खरीदी और करोड़ों रुपये के भुगतान के दावों के बावजूद आधे लाख संग्राहकों का प्रक्रिया से बाहर रहना, मौसम की मार से प्रभावित गांवों की संख्या और तस्करी की घटनाएं कई सवाल खड़े कर रही हैं। जानकारों का मानना है कि केवल रिकॉर्ड आंकड़े सफलता की पूरी तस्वीर नहीं बताते, बल्कि यह भी जरूरी है कि संग्रहण से जुड़े सभी हितग्राहियों की भागीदारी सुनिश्चित हो और अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि वन विभाग और सरकार इन चुनौतियों का समाधान किस तरह करती है, ताकि तेंदूपत्ता कारोबार का लाभ वास्तव में अधिक से अधिक वनवासी परिवारों तक पहुंच सके और रिकॉर्ड खरीदी के दावों के साथ जमीनी स्तर पर भी सफलता दिखाई दे।

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