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राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव के इस्तीफे से TMC में हलचल, पार्टी को लगा एक और बड़ा झटका

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कोलकत्ता 

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद झटका पर झटका लग रहा है. कुछ दिन पहले वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने सांसदी छोड़ दी थी और अब सुष्मिता देव ने भी राज्यसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है. बता दें कि राज्य चुनाव में हार के बाद टीएमसी के 80 में से 58 विधायक भी विरोधी गुट बना चुके हैं।  तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा झटका लगा है. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब टीएमसी पहले से ही अंदरूनी असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने की घटनाओं का सामना कर रही है. उनके इस्तीफे को पार्टी के लिए एक और राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, इस्तीफे के पीछे की वजहों को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. सुष्मिता देव लंबे समय से टीएमसी का प्रमुख चेहरा रही हैं और पार्टी की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। 

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गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने कल ही सोनिया गांधी से मुलाकात की है. ममता पार्टी में टूट रोकने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी हुई हैं लेकिन एक-एक करके उनके साथी साथ छोड़ रहे हैं. कुछ दिन पहले ही लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने दावा किया था कि उनके पास टीएमसी के 28 सांसदों में से 20 का समर्थन हासिल है. गौरतलब है कि दलबदल कानून से बचने के लिए विरोधी गुट को 19 सांसदों की जरूरत है। 

गौरतलब है कि सुष्मिता देव एक वक्त पूर्व सीएम ममता बनर्जी की बेहद खास हुआ करती थीं. लेकिन अब सुष्मिता देब ने अपने पद से ही इस्तीफा दे दिया है. राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्ण को लिखे पत्र में सुष्मिता देव ने कहा है कि मैं राज्यसभा की सदस्य पद से इस्तीफा देता हूं. आपसे इसे तुरंत स्वीकार करने का आग्रह करती हूं। 

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सचिवालय पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंपा। उनका यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष और नेताओं के पार्टी छोड़ने की घटनाएं लगातार चर्चा में हैं।

सुष्मिता देव टीएमसी के उन नेताओं में शामिल रही हैं जिन्हें पार्टी का राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत चेहरा माना जाता था। वह कांग्रेस छोड़कर वर्ष 2021 में टीएमसी में शामिल हुई थीं और तब से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं।

हालांकि, उनके इस्तीफे के पीछे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे टीएमसी के लिए एक और महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

टीएमसी की चुनौतियों क्या कहा था

हाल ही में बातचीत में देव ने टीएमसी के मौजूदा हालात पर चर्चा की थी। उन्होंने लिखा था, 'अच्छी खबर यह है कि ऐसा ही हमने दूसरे राज्यों में भी देखा है। इसकी वजह साफ है कि हमारे विधायकों और कैडर पर बहुत दबाव है…। जमीन पर यह पता चला है कि पुलिस और प्रशासन की तरफ से जबरदस्त दबाव है कि टीएमसी को छोड़ दें या परिणामों के लिए तैयार रहें। यह सच्चाई है। मुझे लगता है कि अगर हिंदी में कहें तो दूध का दूध और पानी का पानी होगा। मुझे लगता है कि यह हमें और मजबूत बनाएगा और आने वाले सालों के लिए तैयार करेगा।'

उन्होंने कहा था, '…ममता दी की ताकत उनकी जनता है, ममता दी की ताकत ईमानदारी है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या कह रहा है, हमारे बारे में क्या नारे लगाए जा रहे हैं। ममता दी में हालात बदलने की क्षमता है। यह चुनौती है और इससे निपटने में हम सक्षम हैं और यह कुछ समय की ही बात है।'

सुखेंदु शेखर रे ने लगाए थे गंभीर आरोप
रे ने इस्तीफा देने के बाद एक पत्र में लिखा था कि पश्चिम बंगाल के मतदाताओं ने 15 वर्ष से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस को भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ हिंसा , शिक्षा, स्वास्थ्य , उद्योग, रोजगार और कानून व्यवस्था सहित सभी क्षेत्रों में बुरी तरह नाकाम रहने पर सत्ता से बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा था, 'मैं लोगों के इस ऐतिहासिक फैसले को विनम्रता से स्वीकार करता हूं तथा तृणमूल कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता एवं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देता हूं।'

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