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गाजियाबाद में नई टैक्स नीति लागू, छूट भी और शर्तें भी

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गाजियाबाद

 उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में गृह कर (हाउस टैक्स) को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब नई दरों के ऐलान के साथ काफी हद तक स्पष्ट हो गया है। नगर निगम ने पुराने रेट के मुकाबले 21 प्रतिशत वृद्धि लागू करने का फैसला किया है, जबकि पहले 200 से 300 प्रतिशत तक बढ़ोतरी को लेकर भारी विरोध दर्ज किया गया था। नई व्यवस्था में जहां एक ओर करदाताओं को राहत देने के लिए कई तरह की छूटों का प्रावधान किया गया है, वहीं कुछ शर्तें और प्रक्रियाएं अब भी लोगों के बीच चर्चा और असंतोष का विषय बनी हुई हैं।

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पहले के भारी विरोध के बाद घटाई गई वृद्धि दर
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने स्पष्ट किया कि पूर्व में हाउस टैक्स में 200 से 300 प्रतिशत तक की वृद्धि प्रस्तावित थी, जिस पर पार्षदों, आरडब्ल्यूए और जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई थी। अब संशोधित व्यवस्था में केवल 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। नगर निगम का दावा है कि यह निर्णय संतुलन बनाकर लिया गया है ताकि राजस्व भी प्रभावित न हो और जनता पर अतिरिक्त बोझ भी न पड़े।

करदाताओं को कई तरह की छूटों का लाभ
नई व्यवस्था के तहत गाजियाबाद नगर निगम ने टैक्स भुगतान में कई राहतें दी हैं। ऑनलाइन टैक्स जमा करने पर 2 प्रतिशत की छूट, समय पर भुगतान करने पर 20 प्रतिशत की छूट और गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग देने पर 10 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट का प्रावधान किया गया है। निगम का कहना है कि इन सुविधाओं का उद्देश्य करदाताओं को डिजिटल भुगतान और स्वच्छता व्यवस्था से जोड़ना है।

10 साल तक पुराने मकानों पर 25% छूट
नई नीति के अनुसार 0 से 10 वर्ष पुराने मकानों पर 25 प्रतिशत तक की छूट स्वतः लागू होगी। इसके लिए किसी प्रकार का प्रमाण पत्र देने की आवश्यकता नहीं होगी। यह छूट सीधे हाउस टैक्स बिल में जुड़कर दिखाई देगी, जिससे करदाताओं को अलग प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।

10 से 40 साल पुराने मकानों के लिए अलग-अलग स्लैब
10 से 20 साल पुराने मकानों पर 32.5 प्रतिशत और 20 से 40 साल पुराने मकानों पर 40 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। हालांकि इन दोनों श्रेणियों में मकान की उम्र का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। इसके लिए रजिस्ट्री की कॉपी, पुराना बिजली बिल, भवन का नक्शा या पुराना हाउस टैक्स बिल मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार किए जाएंगे।

कमर्शियल संपत्तियों पर भी राहत
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि कमर्शियल संपत्तियों पर टैक्स दर घरेलू संपत्तियों की तुलना में 3 से 6 गुना तक बनी रहेगी, लेकिन कुल मिलाकर विभिन्न श्रेणियों में लगभग 32 प्रतिशत तक राहत का लाभ मिल सकता है। निगम का कहना है कि टैक्स कैलकुलेशन घरेलू दरों के आधार पर ही किया जाएगा, जिससे कुछ वर्गों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

कूड़ा अलग देने पर 10% छूट
सबसे अधिक चर्चा में रहने वाली व्यवस्था गीला और सूखा कूड़ा अलग देने पर मिलने वाली 10 प्रतिशत छूट है। इसके लिए करदाताओं को रोजाना कूड़ा गाड़ी पर लगे QR कोड को मोबाइल ऐप से स्कैन करना होगा, जिससे यह दर्ज किया जाएगा कि कचरा अलग-अलग दिया गया है। आलोचकों का कहना है कि यह प्रक्रिया जटिल है और आम नागरिकों के लिए नियमित रूप से इसका पालन करना मुश्किल हो सकता है।

टैक्स विवाद समाधान के लिए बनेगी कमेटी
नगर निगम ने यह भी घोषणा की है कि हाउस टैक्स से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें निगम अधिकारी और पार्षद दोनों शामिल होंगे। यह कमेटी समय-समय पर कैंप आयोजित कर लोगों की समस्याओं का समाधान करेगी और टैक्स प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में काम करेगी।

नई व्यवस्था से राहत और असमंजस दोनों बरकरार
नई दरों के लागू होने के बाद जहां एक ओर करदाताओं को पहले की तुलना में राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं कुछ शर्तों और डिजिटल प्रक्रियाओं को लेकर असमंजस भी बना हुआ है। नगर निगम का दावा है कि यह व्यवस्था लंबे समय में पारदर्शिता और राजस्व दोनों को मजबूत करेगी।

 

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