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TET अनिवार्यता मामले में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, सेवारत शिक्षकों की याचिका हुई खारिज

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प्रयागराज
 उत्तर प्रदेश के सरकारी जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने कक्षा 1 से 8 तक के सभी सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को बरकरार रखते हुए जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

    0.1 कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "याचिका में दम नहीं"
    0.2 ​क्या है सुप्रीम कोर्ट का नया नियम?
    0.3 ​पूर्व में भी खारिज हो चुकी है अपील
    0.4 ​शिक्षकों के सामने अब क्या है रास्ता?

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कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "याचिका में दम नहीं"

​10 अप्रैल 2026 को इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता पूर्व में दिए गए फैसलों को ही चुनौती दे रहे थे, जिसमें कोई नया कानूनी आधार नहीं पाया गया। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तय मानकों के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

​क्या है सुप्रीम कोर्ट का नया नियम?

​1 सितंबर 2025 को अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य के मामले में आए ऐतिहासिक फैसले के आलोक में अब निम्नलिखित नियम लागू होंगे:

    ​दो साल की समय सीमा: जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें आगामी 2 वर्षों के भीतर TET परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।

    ​अनिवार्य सेवानिवृत्ति: यदि ये शिक्षक निर्धारित समय सीमा में परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें VRS (अनिवार्य सेवानिवृत्ति) लेनी होगी।

    ​सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को राहत: जिन शिक्षकों की रिटायरमेंट में 5 वर्ष से कम का समय बचा है, उन्हें परीक्षा से छूट दी गई है। वे अपनी सेवानिवृत्ति तक पद पर बने रह सकते हैं।

    ​पदोन्नति पर रोक: बिना TET पास किए किसी भी शिक्षक को प्रमोशन (पदोन्नति) का लाभ नहीं दिया जाएगा।

​पूर्व में भी खारिज हो चुकी है अपील
​यह पहली बार नहीं है जब शिक्षकों ने इस नियम के विरुद्ध कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इससे पहले 17 नवंबर 2025 को यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटीए) की याचिका को भी न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की खंडपीठ ने खारिज कर दिया था। कोर्ट का स्पष्ट मानना है कि RTE एक्ट (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत योग्यता के मानक सभी पर समान रूप से लागू होते हैं।

​शिक्षकों के सामने अब क्या है रास्ता?
​इस फैसले के बाद अब उत्तर प्रदेश के हजारों पुराने शिक्षकों को अपनी नौकरी बचाने और पदोन्नति पाने के लिए TET की तैयारी शुरू करनी होगी। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के लिए यह फैसला एक बड़े कानूनी अवरोध के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब शीर्ष अदालत ने कानूनी विकल्पों के द्वार लगभग बंद कर दिए हैं।

    ​"शिक्षा के अधिकार के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना अनिवार्य है, और TET उसी गुणवत्ता का एक पैमाना है।" — सुप्रीम कोर्ट का सारांश

 

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