Home देश अंतरिक्ष में 192 करोड़ का टॉयलेट जाम, चंद्रमा से लौटते 4 यात्री...

अंतरिक्ष में 192 करोड़ का टॉयलेट जाम, चंद्रमा से लौटते 4 यात्री मुश्किल में फंसे

42
0
Jeevan Ayurveda

 नई दिल्ली
चंद्रमा के चारों ओर सफल यात्रा के बाद ओरियन स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी की ओर लौट रहा है. सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन $23 मिलियन (करीब 192 करोड़ रुपये) का टॉयलेट अचानक खराब हो गया. यूरिन को स्पेस में फेंकने वाली व्यवस्था बंद हो गई है. NASA का मानना है कि यूरिन सिस्टम में एक केमिकल रिएक्शन की वजह से यह समस्या हुई है. पॉटी निकालने वाली अलग व्यवस्था ठीक काम कर रही है। 

एस्ट्रोनॉट क्रिस्टीना कोच ने कहा कि यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम से जलती हुई हीटर जैसी बदबू आ रही है. फ्लाइट डायरेक्टर रिक हेनफ्लिंग ने बताया कि टॉयलेट अब भी काम कर रहा है, लेकिन समस्या वेस्टवॉटर टैंक को खाली करने में है. वेंट यानी निकासी कम हो गया है. इसलिए क्रू को बैकअप का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

Ad

अभी चारों एस्ट्रोनॉट्स व्यक्तिगत दोबारा इस्तेमाल होने वाले कंटेनर यानी कॉलेप्सिबल कंटिंजेंसी यूरिन डिस्पोजल डिवाइसेस का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह समस्या लिफ्टऑफ के कुछ घंटों बाद ही शुरू हो गई थी. क्रिस्टीना कोच ने सिस्टम के कंट्रोल्स एडजस्ट किए. मिशन कंट्रोल की मदद से रीस्टार्ट किया। 

पहले लगा कि समस्या सुलझ गई है. कोच ने कहा कि मैं खुद को स्पेस प्लंबर कहने पर गर्व महसूस कर रही हूं. उन्होंने टॉयलेट को स्पेसक्राफ्ट का सबसे जरूरी उपकरण बताया। 

समस्या अभी भी बनी हुई है
समस्या पूरी तरह से खत्म नहीं हुई. एस्ट्रोनॉट्स अब भी यूरिन को स्पेस में फेंक नहीं पा रहे हैं. यह मुद्दा ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर में हर प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य विषय बन गया है. यह वही केंद्र है जहां 1970 में अपोलो 13 के दौरान एस्ट्रोनॉट जैक स्विगर्ट ने कहा था कि ह्यूस्टन, हमारी समस्या है. उस समय ऑक्सीजन टैंक फटने से मिशन रद्द हो गया था, लेकिन तीनों एस्ट्रोनॉट्स सुरक्षित वापस लौट आए थे। 

NASA की नई थ्योरी: बर्फ नहीं, केमिकल रिएक्शन  
पहले NASA को लगा कि फिल्टर में बर्फ जमने से समस्या हुई है. इसलिए स्पेसक्राफ्ट को सूरज की तरफ घुमाया गया और हीटर चालू किए गए. लेकिन रिक हेनफ्लिंग ने बताया कि समस्या बर्फ की नहीं है. अब नई थ्योरी यह है कि यूरिन को बैक्टीरिया और माइक्रोऑर्गेनिज्म से बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल के रिएक्शन से कुछ कचरा बन रहा है, जो फिल्टर में फंस गया है। 

ओरियन का टॉयलेट ISS जैसा, लेकिन पहली बार डीप स्पेस में
ओरियन स्पेसक्राफ्ट में लगा टॉयलेट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) वाले टॉयलेट जैसा है. लेकिन यह पहली बार किसी क्रूड डीप स्पेस मिशन में इस्तेमाल हो रहा है. अपोलो मिशन के एस्ट्रोनॉट्स के पास टॉयलेट नहीं था, वे विशेष बैग इस्तेमाल करते थे. ओरियन 5 मीटर चौड़ा और 3 मीटर ऊंचा है। 

टॉयलेट फ्लोर के नीचे है – यही एकमात्र जगह है जहां एस्ट्रोनॉट्स अकेले रह सकते हैं. अंदर बहुत शोर होता है, इसलिए कान की सुरक्षा जरूरी है. माइक्रोग्रैविटी में काम करने के लिए सक्शन सिस्टम लगा है. मल को डिस्पोजेबल बैग में रखकर दबाया जाता है. पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा। 

NASA की एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर लोरी ग्लेज ने कहा कि जैसे ही स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी पर उतरेगा, हम अंदर जाकर समस्या की जड़ तक पहुंचेंगे. ओरियन शुक्रवार को प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन करेगा. यह छोटी-सी समस्या स्पेस मिशन की जटिलता दिखाती है. $23 मिलियन का टॉयलेट भी पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। 

 

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here