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ईरान की धमकी के बीच अमेरिका ने लिया फैसला बदलने का कदम, होर्मुज स्ट्रेट पर तेल टैंकरों की आवाजाही पर असर

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वाशिंगटन

मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के बीच एक सोशल मीडिया पोस्ट ने वैश्विक तेल बाजार में अचानक हलचल मचा दी. अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक तेल टैंकर को सुरक्षा देते हुए एस्कॉर्ट किया है, ताकि दुनिया तक तेल की आपूर्ति जारी रह सके. लेकिन यह दावा ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया. कुछ ही मिनटों बाद यह पोस्ट हटा दी गई और व्हाइट हाउस को आगे आकर सफाई देनी पड़ी।

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क्रिस राइट ने अपने पोस्ट में लिखा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान भी वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना ने सफलतापूर्वक एक तेल टैंकर को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित बाहर निकलने में मदद की, ताकि वैश्विक बाजारों तक तेल की आपूर्ति बनी रहे।

हालांकि, यह जानकारी सामने आते ही तेल बाजार में तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली. कुछ ही देर में कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया. इसके बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में साफ किया कि अमेरिकी नौसेना ने फिलहाल किसी भी तेल टैंकर को एस्कॉर्ट नहीं किया है. उन्होंने कहा कि ऐसा करना एक विकल्प जरूर हो सकता है, लेकिन अभी ऐसा कोई मिशन नहीं चल रहा है।

अमेरिकी मंत्री के दावे को IRGC ने नकारा
इस मामले पर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने भी प्रतिक्रिया दी थी. ईरान के अधिकारियों ने अमेरिकी ऊर्जा मंत्री के दावे को पूरी तरह गलत बताया. उनका कहना था कि कोई भी अमेरिकी नौसैनिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट के आसपास आने की हिम्मत तक नहीं कर पाया. बाद में अमेरिकी ऊर्जा विभाग के एक प्रवक्ता ने भी कहा कि ऊर्जा मंत्री के एक्स अकाउंट से जो वीडियो पोस्ट किया गया था, उसे विभाग के कर्मचारियों ने गलत कैप्शन के साथ साझा कर दिया था, इसलिए उसे हटा दिया गया।

यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक बाजार पहले से ही बेहद संवेदनशील स्थिति में हैं. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है. यहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी की सप्लाई गुजरती है।

ऑयल टैंकर पर हमले, शिपिंग कंपनियों ने बंद की सर्विस
हाल ही में यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑर्गनाइजेशन और अन्य एजेंसियों के आंकड़ों में भी चिंता जताई गई है. 1 से 10 मार्च के बीच कम से कम 10 तेल टैंकरों पर हमले या हमले की कोशिशें दर्ज की गई हैं. इन घटनाओं के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया है।

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से फारस की खाड़ी में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है. इसके कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल का भंडार बढ़ने लगा है. कई तेल उत्पादक देशों को मजबूर होकर उत्पादन कम करना पड़ा है. सऊदी अरब, कुवैत, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देश रोजाना लाखों बैरल कम तेल निकाल रहे हैं।

अगर बंद रहा होर्मुज स्ट्रेट तो वैश्विक बाजार पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जल्दी बहाल नहीं हुई, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर और ज्यादा पड़ सकता है. हालांकि, ईरान ने साफ संकेत दिया है कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, तब तक फारस की खाड़ी से तेल निर्यात सामान्य नहीं होने दिया जाएगा।

युद्ध से पहले हर दिन औसतन करीब 138 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है. इसी बीच ट्रंप प्रशासन वैश्विक बाजार को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को बीमा सुरक्षा देने और जरूरत पड़ने पर नौसेना से टैंकरों को एस्कॉर्ट करने का प्रस्ताव दिया है. इसके बावजूद तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

JPMorgan Chase के कमोडिटी विश्लेषकों ने मंगलवार को कहा, जब तक Strait of Hormuz से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक ऐसे नीतिगत फैसलों का तेल की कीमतों पर ज्यादा असर नहीं होगा।

युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया. सोमवार को कीमतें करीब 30 फीसदी बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. हालांकि बाद में थोड़ी गिरावट आई, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है. लेकिन इसके अगले ही दिन अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि ईरान के अंदर अब तक के सबसे आक्रामक हमले किए जाएंगे, जिससे बाजार में फिर अनिश्चितता बढ़ गई।

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