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भारतीय ज्ञान परंपरा हमारी ताकत, इसे आगे बढ़ाना समय की मांग : मंत्री परमार

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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रम 2026 का किया शुभारंभ

भोपाल
उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारत देश कभी गरीब नहीं था, बल्कि एक समृद्ध देश था। भारत को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। भारत का ज्ञान सर्वश्रेष्ठ था और यहां का किसान आत्मविश्वासी और सामर्थ्यवान था। भारत का समाज, शिक्षित समाज था। भारत की संस्कृति और परंपराएं मजबूत थी। वैज्ञानिक भारतीय समाज की विशेषता थी। भारत की इसी समृद्धि के कारण ही विदेशी लुटेरे, मुगल और अंग्रेज भारत आए तथा समृद्ध भारत को हर स्तर पर लूटने का प्रयास किया। संस्कृति, परंपराओं,वेदों , शिक्षा केंद्रों, खेल परिसरों आदि को नष्ट करने के कार्य के साथ भारतीय समाज के अशिक्षित होने, रूढ़िवादी होने, अंधविश्वासी होने का दुष्प्रचार भी किया। अब समय आ गया है जब हम भारत के महानतम ज्ञान एवं भारतीय समाज के बारे में भ्रांतियां को दूर करने के सशक्त उपाय करते हुए देश की स्वतंत्रता की 100वी वर्षगांठ वर्ष-2047 तक भारत को, विकसित भारत के महानतम लक्ष्य के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के वैशिष्ट्य को पूरी क्षमता से मनाए।

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मंत्री परमार ने कहा भारतीय समाज की अवधारणा को समझने और पुनः स्मरण करने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस एक उपयुक्त अवसर है कि जब हम वैज्ञानिक शोध करें और यदि हमें सामाजिक मान्यताओं में रूढ़िवाद, अंध विश्वास दिखे, तो हमें छोड़ना पड़ेगा। हम युगानुकल परिवर्तन के पक्षधर हैं। मंत्री परमार नेसोमवार को महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित 2 दिवसीय राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रम 2026 का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। इसके पहले मंत्री परमार ने एविएशन विंग का भ्रमण कर गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। मंत्री  परमार ने उड़ान अकादमी के अधिकारियों से विचार विमर्श कर कार्यक्रम के प्रगति की जानकारी भी ली।

कार्यक्रम में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भारत सरकार, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एस. पी. गौतम एवं अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र कुमार कुडरिया, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ आर पी सिंह, पूर्व कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा, पूर्व कुलगुरु प्रो कपिल देव मिश्रा सहित शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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