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बोत्सवाना से आ रहे 8 चीते कूनो में, ग्रैंड लैंडिंग और बाड़े में रिलीज का आयोजन आज शनिवार को

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 श्योपुर/ग्वालियर
MP के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी महाद्वीप से चीतों का तीसरा बड़ा जत्था भारत आ रहा है. बोत्सवाना से एयरलिफ्ट किए गए इन 8 चीतों (6 मादा और 2 नर) का स्वागत खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव करेंगे.

चीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि बोत्सवाना से छह मादा और दो नर चीतों का बैच शुक्रवार रात 9 बजे से 10 बजे के बीच इंडियन एयर फोर्स (IAF) के एयरक्राफ्ट से ग्वालियर के लिए उड़ान भरी। 

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ग्वालियर से, दो IAF हेलीकॉप्टर चीतों को कुनो नेशनल पार्क ले जाएंगे, जहां उनके शनिवार सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच पहुंचने की उम्मीद है.

उन्होंने कहा कि बोत्सवाना से ग्वालियर तक की उड़ान का समय लगभग नौ से 10 घंटे का रहा . उन्होंने कहा कि यह अफ्रीका से आने वाला चीतों का तीसरा बैच होगा, इससे पहले नामीबिया और साउथ अफ्रीका से चीते लाए गए थे. इसके साथ ही, भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 46 हो जाएगी.

क्वारंटाइन और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

चीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा कि पार्क में बाड़े तैयार किए गए हैं, जहां चीते लगभग एक महीने तक क्वारंटाइन में रहेंगे. उनकी सुरक्षित लैंडिंग के लिए पार्क में 5 हेलीपैड हैं.

पिछली बार की तरह, IAF चीतों को अफ्रीका से लाकर उन्हें फिर से बसाने के प्रोग्राम में मदद करेगी, ठीक वैसे ही जैसे उसने फरवरी 2023 में SA से चीते को लाते समय किया था.

आबादी को 50 तक बढ़ाना लक्ष्य

प्रोजेक्ट डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने कहा कि इससे पहले, सितंबर 2022 में एक प्राइवेट जेट से 8 चीतों को नामीबिया से ग्वालियर लाया गया था, जिसके बाद IAF के हेलीकॉप्टरों ने उन्हें पार्क पहुंचाया था. और चीतों के आने से भारत का चीता रिवाइवल प्रोग्राम और मजबूत होगा. केंद्र सरकार के सपोर्ट से, हमारा मकसद जल्द से जल्द आबादी को 50 तक बढ़ाना है.

पिछले साल, भारत में 12 शावकों का जन्म हुआ, हालांकि तीन शावकों समेत छह जिंदा नहीं बचे. इस साल, 7 फरवरी से 18 फरवरी के बीच, दो बार में 8 शावक पैदा हुए.

KNP में 39 शावक पैदा हो चुके

2023 से KNP में कुल 39 शावक पैदा हुए हैं, जिनमें से 27 जिंदा हैं. नामीबिया में जन्मी ज्वाला और आशा, साउथ अफ्रीका में जन्मी गामिनी, वीरा और निरवा, और भारत में जन्मी मुखी, सभी ने KNP में बच्चे दिए हैं. तीन चीतों को मंदसौर जिले के गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में भेज दिया गया है, जबकि 35 अभी भी KNP में हैं.

बता दें कि दुनिया का सबसे तेज जमीन पर रहने वाला जानवर चीता, भारत में लगभग सात दशक पहले खत्म हो गया था. दोबारा उसे बसाए जाने का प्रोजेक्ट चल रहा है. इसकी शुरुआत साल 2022 में कर दी गई थी. यह अफ्रीका से आने वाला चीतों का तीसरा बैच है. इससे पहले नामीबिया (2022) और दक्षिण अफ्रीका (2023) से चीते लाए गए थे.

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