Home अध्यात्म क्या आपके घर में भी लगी हैं ये तस्वीरें? जानिए क्यों वास्तु...

क्या आपके घर में भी लगी हैं ये तस्वीरें? जानिए क्यों वास्तु शास्त्र मानता है इन्हें नकारात्मक

35
0
Jeevan Ayurveda

घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए लोग देवी-देवताओं की तस्वीरें और मूर्तियां स्थापित करते हैं। मान्यता है कि सही विधि और सही स्वरूप में की गई पूजा से घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है। हालांकि, वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार हर देवी-देवता की हर तस्वीर या मूर्ति घर में रखना शुभ नहीं माना जाता।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ विशेष देवी-देवताओं के उग्र स्वरूप, खंडित प्रतिमाएं या युद्ध दर्शाती तस्वीरें घर में रखने से मानसिक तनाव, आपसी कलह और आर्थिक तंगी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। आइए जानते हैं किन देवी-देवताओं की तस्वीरें घर में रखने से बचना चाहिए और इसके पीछे क्या कारण बताए गए हैं।

Ad

भगवान भैरव और नटराज की मूर्ति
भगवान शिव के उग्र रूप भैरव महाराज की तस्वीर या मूर्ति घर के भीतर रखना शुभ नहीं माना जाता। शास्त्रों के अनुसार, भैरव तंत्र साधना के देवता हैं और उनकी पूजा मुख्य रूप से घर के बाहर या मंदिर में की जानी चाहिए।

इसी तरह, नटराज स्वरूप में भगवान शिव तांडव मुद्रा में होते हैं, जो विनाश और प्रलय का प्रतीक मानी जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, इस स्वरूप की मूर्ति घर में रखने से अशांति और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

शनि देव की प्रतिमा
शनि देव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी दृष्टि अत्यंत प्रभावशाली और उग्र मानी जाती है। यही कारण है कि शनि देव की मूर्ति या तस्वीर घर में लगाना उचित नहीं माना गया है।

शनि देव की पूजा के लिए मंदिर या शनि पीठ में जाना शुभ माना जाता है। घर में उनकी प्रतिमा रखने से परिवार के सदस्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका बताई जाती है।

देवी काली का उग्र स्वरूप
मां काली शक्ति और संहार की देवी हैं, लेकिन घर में उनका अत्यंत उग्र या विकराल स्वरूप रखना शुभ नहीं माना जाता। ऐसी तस्वीरें जिनमें मां काली राक्षसों का संहार करती दिखाई दें या अत्यधिक उग्र रूप में हों, घर में नकारात्मक ऊर्जा और क्रोध को बढ़ा सकती हैं।

वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में मां लक्ष्मी, मां सरस्वती या मां दुर्गा के सौम्य और आशीर्वाद देते हुए स्वरूप की पूजा करना अधिक शुभ माना गया है।

खंडित मूर्तियां या टूटी हुई तस्वीरें
वास्तु शास्त्र में खंडित मूर्तियों को सबसे बड़ा दोष माना गया है।

टूटी हुई मूर्ति, तस्वीर का टूटा या चटका हुआ कांच
इन सभी को घर में रखना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि खंडित प्रतिमाएं दुर्भाग्य को आकर्षित करती हैं और घर की बरकत को रोक देती हैं। ऐसी मूर्तियों या तस्वीरों को तुरंत सम्मानपूर्वक हटा देना चाहिए।

युद्ध या क्रोध मुद्रा वाली तस्वीरें
किसी भी देवी-देवता की ऐसी तस्वीर जिसमें वे युद्ध करते हुए या अत्यधिक क्रोध में दिखाई दें, घर के वातावरण को तनावपूर्ण बना सकती है। उदाहरण के लिए, महाभारत युद्ध या अन्य संघर्ष दर्शाती धार्मिक तस्वीरें घर में शांति भंग कर सकती हैं। ऐसे दृश्य पूजा स्थान के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते।

इन वास्तु नियमों का भी रखें ध्यान
पीठ दिखाई न दे: भगवान की मूर्ति या तस्वीर इस तरह न रखें कि उनकी पीठ दिखाई दे।
आमने-सामने न हों: एक ही देवी-देवता की दो मूर्तियां या तस्वीरें आमने-सामने न रखें।
मंदिर की सही दिशा: घर का मंदिर हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में होना चाहिए।
साफ-सफाई: पूजा स्थल को हमेशा स्वच्छ और व्यवस्थित रखें।

वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में देवी-देवताओं की सही तस्वीरें और मूर्तियां रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। वहीं, गलत स्वरूप या खंडित प्रतिमाएं घर की शांति और समृद्धि में बाधा बन सकती हैं। इसलिए पूजा स्थल की व्यवस्था करते समय इन नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here