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मध्य प्रदेश का नक्सल मुक्त अभियान सफल, रामधेर मज्जी और 12 साथियों का सरेंडर

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बालाघाट 

मध्यप्रदेश से माओवादी ढांचे का अंतिम किला भी ढह गया है. देश के सबसे खतरनाक और एक करोड़ इनामी माओवादी नेता सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) रामधेर मज्जी ने सोमवार तड़के अपने 11 टॉप कमांडरों के साथ हथियार डाल दिए. यह सरेंडर छत्तीसगढ़ में खैरागढ़ जिले के बाकरकट्टा थाना क्षेत्र के कुमही गांव में हुआ, जहां रामधेर ने AK–47 पुलिस के हवाले कर दी. उसके साथ DVCM और ACM स्तर के आतंकी चंदू उसेंडी, ललिता, जानकी, प्रेम, रामसिंह दादा और सुकैश पोट्टम भी हथियारों के साथ सामने आए. छह महिला नक्सलियों ने भी INSAS, SLR और .303 जैसे हथियार सौंप दिए. दशकों से तीन राज्यों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए यह सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है.

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मध्य प्रदेश का यह प्रमुख नक्सल प्रभावित जिला, जिसकी पहचान 1990 के दशक से नक्सली हिंसा और सक्रियता के लिए रही है, अब आधिकारिक रूप से नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है।

यह उपलब्धि केंद्रीय गृह मंत्रालय की मार्च 2026 की तय समय सीमा से पहले हासिल हुई है।

अब सिर्फ एक नक्सली दीपक सक्रिय बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा के मुताबिक, नक्सलियों ने पुनर्वास से पुनर्जीवन तक सरकार की नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया है। इससे जिला लगभग नक्सली मुक्त हो गया है। जिले में अब सिर्फ एक नक्सली दीपक सक्रिय है। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि वह भी जल्द सरेंडर कर देगा।

एमएमसी जोन प्रभारी रामधेर मज्जी भी शामिल आत्मसमर्पण करने वालों में एमएमसी जोन प्रभारी रामधेर मज्जी भी शामिल रहे, जिन्होंने एक AK-47 राइफल सौंपकर समर्पण किया। उनकी गार्ड और हार्डकोर नक्सली मानी जाने वाली सुनीता ओयाम कुछ वक्त पहले ही बालाघाट पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुकी थी। इस दौरान कुल 12 हथियार सौंपे गए, जिनमें दो एके-47, दो इंसास, एक एसएलआर और दो .303 राइफलें शामिल हैं।

प्रमुख नक्सली, जिन्होंने किया समर्पण सरेंडर करने वाले अन्य प्रमुख नक्सलियों में चंदू उसेंडी (डीवीसीएम), ललिता (डीवीसीएम), जानकी (डीवीसीएम), प्रेम (डीवीसीएम), राम सिंह दादा (एसीएम), सुकेश पोट्टम (एसीएम), लक्ष्मी (पीएम), शीला (पीएम), सागर (पीएम), कविता (पीएम) और योगिता (पीएम) शामिल हैं।

इन नक्सलियों ने पुनर्वास योजना के तहत सरेंडर किया है। उन्हें राज्य सरकार की मौजूदा पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण और सामाजिक पुनर्स्थापन का आश्वासन दिया गया है।

29 नवंबर को महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में 11 नक्सलियों का एक दल आत्मसमर्पण कर चुका है, जिसका नेतृत्व अनंत उर्फ विकास नागपुरे कर रहा था, जो पिछले महीने हॉक फोर्स के इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की हत्या में शामिल था. NDTV ने कुछ दिनों पहले ही अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में खुलासा किया था कि रामधेर अब सिर्फ अपने बचे हुए 14 हथियारबंद कैडरों के साथ दक्षिणी MMC ज़ोन के घने जंगलों में छिपा हुआ था. सुरक्षा एजेंसियों ने  बताया था कि यही समूह पूरी MMC संरचना का आखिरी किला है.

29 नवंबर को अनंत उर्फ विकास नागपुरे के सरेंडर के बाद रामधेर नेटवर्क से बिल्कुल अलग-थलग पड़ चुका था. अनंत ने जाते हुए चार कैडरों को यही जिम्मा दिया था कि रामधेर से संपर्क करें और उसे हथियार डालने के लिए तैयार करें.

इससे मध्यप्रदेश के लिए यह हफ्ता ऐतिहासिक बन गया है. सिर्फ 24 घंटे पहले बालाघाट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में MMC के KB डिविजन के 10 बड़े नक्सलियों ने ₹2.36 करोड़ के इनाम के साथ सरेंडर किया था. NDTV ने तभी रिपोर्ट किया था कि इसके बाद ( मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़) यानि दक्षिणी MMC ज़ोन हिल जाएगा और रामधेर की यूनिट भी टूट जाएगी और अब, कुछ ही घंटों में, वह आखिरी दीवार भी ढह गई. इससे मध्यप्रदेश अब लगभग पूरी तरह नक्सल-मुक्त माना जा रहा है.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को ही कहा था कि “आज का दिन MP पुलिस के नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी जीत है. डिंडौरी और मंडला पहले ही मुक्त थे, बालाघाट भी अब बड़े पैमाने पर नक्सल मुक्त हो रहा है. यह ऑपरेशन ‘सरेंडर करो या समाप्त हो जाओ' की नीति की ऐतिहासिक सफलता है.”

उत्तर MMC ज़ोन पहले ही खाली हो चुका था. अब दक्षिणी MMC ज़ोन के सबसे बड़े नाम रामधेर के सरेंडर के बाद पूरे MMC क्षेत्र जो तीन राज्यों तक फैला था, का सफाया माना जा रहा है. इससे कान्हा नेशनल पार्क, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और पूरे जंगल कॉरिडोर की सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ेगा.

जो दस नक्सली रविवार को आत्मसमर्पण करने पहुंचे, वे MMC ज़ोन के कान्हा–भोरा देव (KB) डिवीजन से जुड़े थे, जो छत्तीसगढ़ के कबीरधाम और MP के बालाघाट व मंडला जिलों में सक्रिय था. आत्मसमर्पण करने वालों में MMC ज़ोन के विशेष जोनल समिति सदस्य सुरेंद्र उर्फ कबीर सोड़ी (50), राकेश ओड़ी उर्फ मनीष, और एरिया कमेटी सदस्य लालसिंह मरावी, सलीता उर्फ सावित्री, नवीन नुप्पो उर्फ हिड़मा, जैशीला उर्फ ललिता ओयम, विक्रम उर्फ हिड़मा वट्टी, जरीना उर्फ जोगी मुसक और समर उर्फ सोमरू शामिल हैं. इनकी उम्र 26 से 50 वर्ष के बीच है और ये सभी छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं. इनमें से कई पर ग्रामीणों की हत्याओं का गंभीर आरोप है, जिन्हें पुलिस मुखबिर समझकर मारा गया था.

रविवार का आत्मसमर्पण उस घटना के 36 दिन बाद हुआ है, जब 14 लाख के इनाम वाली नक्सली सुनीता ने हथियार डाले थे, रविवार का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इसी से एक दिन पहले MP पुलिस और रामधेर की टीम के बीच MP–छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर मुठभेड़ हुई थी. 2025 में अब तक MP पुलिस ने टारगेटेड ऑपरेशंस में 10 खतरनाक नक्सलियों का एनकाउंटर किया है, जिन पर कुल 1.86 करोड़ रुपये का इनाम था.

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