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प्रदेश के इतिहास में सत्ता में रहते हुए अपने ही बेटे को पदमुक्त करने वाला पहला उदाहरण : डॉ संजय निषाद

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लखनऊ

    आज लखनऊ स्थित अपने आवास 01, विक्रमादित्य मार्ग पर निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार के मा० कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद जी ने उत्तर प्रदेश प्रदेश कमेटी की बैठक की। यह बैठक हाल ही में दिल्ली में संपन्न राष्ट्रीय अधिवेशन एवं प्रदेश कमेटी में हुए बदलावों के बाद प्रदेश स्तर पर आयोजित पहली बैठक थी।

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    बैठक में डॉ. निषाद जी ने महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णय लेते हुए प्रदेश नेतृत्व में बड़े बदलाव किए। उन्होंने अपने सुपुत्र एवं चौरीचौरा विधायक ई. सरवन निषाद को प्रदेश प्रभारी पद से हटाकर बाबूराम निषाद को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया। साथ ही पिछड़ा वर्ग आयोग, उ.प्र. के सदस्य रविन्द्र मणि निषाद को राष्ट्रीय कमेटी में पदोन्नत किया गया तथा प्रदेश अध्यक्ष पद से  रविन्द्र मणि निषाद को हटाकर व्यास मुनि निषाद को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया गया।
    डॉ. संजय निषाद जी ने कहा कि संगठन में बदलाव समय की आवश्यकता है। नई टीम के साथ नई ऊर्जा का संचार होगा और पार्टी को और मज़बूती मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में पार्टी को आज जिस मुकाम तक पहुँचाने में ई० सरवन निषाद और रविन्द्र मणि निषाद का योगदान रहा है, वह सराहनीय है। लेकिन अब समय है कि नई पीढ़ी को जिम्मेदारी दी जाए।

    उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग मुझे परिवारवाद का आरोपी बताते थे, उन्हें आज यह देखना चाहिए कि निषाद पार्टी ने उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक कदम उठाया है। मैंने सत्ता में रहते हुए अपने ही पुत्र को पद से मुक्त किया है। शायद ही किसी पार्टी ने ऐसा बड़ा निर्णय लिया होगा। मेरे लिए समाज और संगठन सबसे ऊपर है, परिवार नहीं।

    डॉ. निषाद ने कहा कि उनका परिवार हमेशा संघर्षों और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा है। “राजा का बेटा ही राजा बने” की नीति पर सवाल उठाने वालों के लिए यह निर्णय बड़ा संदेश है। अब अपेक्षा है कि अन्य दल भी इसी प्रकार का साहस दिखाकर समाज में सकारात्मक संदेश दें।

    बैठक में प्रदेश कमेटी द्वारा विधानसभा एवं त्रिस्तरीय चुनाव की रूपरेखा, आरक्षण के मुद्दे पर सामाजिक आंदोलन, नई जिला स्तरीय कमेटियों के गठन एवं पार्टी विस्तार पर विस्तृत चर्चा की गई।

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