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Maruti का समाधान: पुरानी कारों के लिए E20 कन्वर्जन किट, एथेनॉल पर आसानी से चलेगी गाड़ी

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मुंबई 

Maruti E20 Upgrade Kit: इस समय एथेनॉल ब्लेंड फ्यूल (E20 पेट्रोल) को लेकर देश भर में चर्चा हो रही है. कई पुराने वाहन मालिकों ने शिकायत की है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनके वाहनों का माइलेज और परफॉर्मेंस प्रभावित हुआ है. इस मामले में सरकार ने भी माना है कि, कुछ वाहनों में एथेनॉल ब्लेंड फ्यूल के प्रयोग से उनके माइलेज में गिरावट आ सकती है. अब ख़बर आ रही है कि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इस समस्या का एक समाधान लेकर आ रही है. 

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मारुति पेश कर सकती है E20 अपग्रेड किट 

ऑटोकार की रिपोर्ट के अनुसार, मारुति सुजुकी आने वाले समय में E20 मटेरियल अपग्रेड किट पेश कर सकती है और ऐसा 10 से 15 साल पुराने मॉडलों के लिए किया जाएगा. इन किट की कीमत के बारे में ज़्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. लेकिन रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि, इस E20 अपग्रेड किट की कीमत तकरीबन 4,000 रुपये से 6,000 रुपये के बीच हो सकती है. इसके अलावा ये भी ख़बर है कि कुछ अन्य ब्रांड भी अपग्रेड प्रोग्राम की संभावना तलाश रहे हैं और जल्द ही इन्हें लागू किया जा सकता है.

क्या मिलेगी सब्सिडी?

हालांकि अभी मारुति सुजुकी द्वारा पेश किए जाने वाले इस E20 अपग्रेड किट के बारे में कंपनी की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है. इसलिए अभी इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल सकी है कि, इस किट पर सब्सिडी दी जाएगी या नहीं और अगर दी जाती है तो ये सब्सिडी किसके द्वारा ग्राहकों को मिलेगी.  

कैसे अपग्रेड होगी पुरानी कार?

किसी भी वाहन में E20 कम्पलायंस तय करने के लिए मॉडिफिकेशन और साथ ही कुछ ख़ास कंपानेंट्स में बदलाव करना जरूरी होता है. जिनमें मेटल, रबर और प्लास्टिक के पुर्जे जैसे फ्यूल लाइन, सील और गास्केट इत्यादि शामिल होते हैं. हालाँकि, किसी भी बदलाव से पहले कुछ टेस्टिंग किए जाने की जरूरत है, ख़ास तौर पर पुराने इंजनों को लेकर जिनका प्रोडक्शन अब बंद हो चुका है. कार इंजन में मॉडिफिकेशन के बाद जब उन्हें ग्राहकों को लौटाया जाएगा तो इस बात की तस्दीक करना कि वो E20 स्टैंडर्ड का पालन करते हैं, ये भी एक चुनौती होगी.

E20 पेट्रोल पर क्या कहती है सरकार?

एथेनॉल ब्लेंड पेट्रोल से वाहनों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को लेकर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने अपनी सफाई दी है. मंत्रालय का कहना है कि, ऐसी चिंताएं "काफी हद तक निराधार" और "वैज्ञानिक प्रमाणों या विशेषज्ञ विश्लेषण" से रहित हैं. हालांकि, मंत्रालय ने 4 अगस्त 2025 को सोशल नेटवर्किंग साइट 'X' पर किए गए अपने पोस्ट में कहा कि, "कुछ पुराने वाहनों में, लगभग 20,000 से 30,000 किलोमीटर के लंबे उपयोग के बाद, कुछ रबर पुर्जों/गैस्केट को बदलने की सलाह दी जा सकती है. यह रिप्लेसमेंट सस्ता है और वाहन की नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से किया जा सकता है."

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