हैदराबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा एनएमडीसी लिमिटेड के सहयोग से ‘प्रवासी हिंदी साहित्य : सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य’ विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हाइब्रिड मोड में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वानों, साहित्यकारों और शोधार्थियों ने सहभागिता करते हुए प्रवासी हिंदी साहित्य की विविध प्रवृत्तियों, चुनौतियों तथा संभावनाओं पर गंभीर विमर्श किया।
संगोष्ठी का बीज व्याख्यान लंदन स्थित सुप्रसिद्ध प्रवासी लेखिका दिव्या माथुर ने प्रस्तुत किया। उन्होंने विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के सामाजिक-सांस्कृतिक संघर्षों तथा उनकी साहित्यिक अभिव्यक्तियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वभर में हिंदी में महत्वपूर्ण साहित्य सृजित हो रहा है, जिस पर गंभीर शोध एवं अनुसंधान की आवश्यकता है।
मुख्य अतिथि प्रो. रहमान मुसव्विर (जामिया मिल्लिया इस्लामिया) ने प्रवासी हिंदी साहित्य की विभिन्न धाराओं का विश्लेषण करते हुए कहा कि गिरमिटिया देशों, यूरोपीय देशों तथा खाड़ी देशों के प्रवासी साहित्य की प्रवृत्तियाँ एक-दूसरे से भिन्न हैं और इनकी अपनी विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि है। विशिष्ट वक्ता प्रो. आर.एस. सर्राजु (भारतीय भाषा समिति, नई दिल्ली) ने यूरोप और रूस के प्रवासी हिंदी लेखन की वर्तमान स्थिति एवं चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. श्याम राव ने की। उन्होंने प्रवासी हिंदी साहित्य को विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में समुचित स्थान दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
एनएमडीसी लिमिटेड के उप महाप्रबंधक (राजभाषा) चे.निवास राव ने स्वागत भाषण देते हुए इस आयोजन को समयानुकूल और महत्वपूर्ण पहल बताया। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. जे. आत्माराम ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
संगोष्ठी के अंतर्गत दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र की अध्यक्षता मानविकी संकाय के अधिष्ठाता प्रो. वी. कृष्ण ने की। इस सत्र में डॉ. रेखा राजवंशी (ऑस्ट्रेलिया), डॉ. गिरिजा सिंह बिसेसर अरविंद (मॉरीशस), डॉ. विवेकमणि त्रिपाठी (चीन) तथा डॉ. प्रियंका कुमारी (लखनऊ) ने अपने शोधपरक विचार प्रस्तुत किए।
द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. गजेन्द्र पाठक ने की। इसमें प्रो. पद्मप्रिया, प्रोफेसर, (पांडिचेरी विश्वविद्यालय), डॉ. धन्य कुमार बिराजदार (महाराष्ट्र), डॉ. प्रोमिला तथा डॉ. संजय कुमार (ईएफएल विश्वविद्यालय), डॉ. अमरनाथ प्रजापति (कर्नाटक), शोधार्थी प्रियंका शुक्ला एवं विद्यार्थी प्रतिनिधियों ने अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए। सत्र का संचालन प्रद्युम्न तोमर ने किया।
इसके उपरांत आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिव्या, अंजलि प्रियदर्शिनी एवं आरजू कुमारी ने मॉरीशस के गिरमिटिया मजदूरों से संबंधित भोजपुरी लोकगीत प्रस्तुत कर उपस्थितजनों को भावविभोर कर दिया।
समापन सत्र में प्रवासी साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वान प्रो. अजय कुमार साहू ने प्रवासी साहित्य के विविध आयामों पर व्याख्यान देते हुए उसके वैश्विक महत्व को रेखांकित किया। संगोष्ठी के सह-संयोजक डॉ. कपिल कुमार रंजन ने संगोष्ठी की विस्तृत प्रतिवेदन-रिपोर्ट प्रस्तुत की। अंत में संगोष्ठी संयोजक डॉ. जे. आत्माराम ने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
संगोष्ठी में देश-विदेश से बड़ी संख्या में शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की तथा प्रवासी हिंदी साहित्य के विविध पक्षों पर सार्थक विमर्श हुआ।
इस अवसर पर हिंदी विभाग के वर्ष 1988-90 बैच के पूर्व विद्यार्थियों का विशेष पुनर्मिलन (Alumni Meet) भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सीएच निवास राव,, डॉ. पद्मप्रिया, तुनुजा, लीला लक्ष्मी एवं शांतिप्रिया ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए हैदराबाद विश्वविद्यालय में बिताए गए अविस्मरणीय क्षणों को याद किया। वक्ताओं ने विभागीय गतिविधियों, शिक्षकों के मार्गदर्शन तथा सहपाठियों के साथ बिताए गए समय को अपने जीवन की अमूल्य धरोहर बताते हुए विश्वविद्यालय से अपने भावनात्मक जुड़ाव को व्यक्त किया। इस आत्मीय संवाद ने न केवल पुरानी यादों को ताज़ा किया, बल्कि वर्तमान विद्यार्थियों को भी प्रेरणा प्रदान की।









