Home अध्यात्म शाम को करें ये खास उपाय, शनिदेव देंगे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

शाम को करें ये खास उपाय, शनिदेव देंगे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

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आज शनि जयंती की शाम पीपल के पेड़ के नीचे दीया जरूर जलाएं। इसी के साथ शनिदेव के एक खास मंत्र का भी जाप करें। हिंदू धर्म में शनिवार के दिन शनि भगवान की पूजा का विशेष महत्व होता है और शनि जयंती है तो आज का दिन और भी खास बन चुका है। बता दें कि लंबे इंतजार के बाद ऐसा संयोग बना है कि शनिवार के दिन ही शनि जयंती पड़ रही हो। आज न्याय और कर्मों के देवता कहने जाने वाले शनिदेव की पूजा करने से जिंदगी के कई कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा-पाठ और मंत्र जाप करने से जीवन की परेशानियां कम हो सकती हैं और शनिदेव की कृपा मिल सकती है।

शनि जयंती की शाम बहुत ही शक्तिशाली और विशेष मानी जाती है। आज शाम दीया जलाकर शनिदेव से सुख-शांति की कामाना करने से उनकी कृपा जरूर मिलती है। वहीं अगर दीए को सही दिशा और सही मंत्र के साथ जला लिया जाए तो पूजा का महत्व और भी बढ़ जाएगा।

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शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त
शनिदेव की पूजा का एक मुहूर्त निकल चुका है। अब शाम का एक मुहूर्त बचा है जोकि विशेष है। आम तौर पर शनिदेव मंदिर में भक्तों की भीड़ शाम में ही नजर आती है। दरअसल शनिदेव की पूजा के लिए शाम का समय ही सबसे शुभ माना जाता है। आज शनि जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:05 बजे से शुरु होकर रात 08:23 बजे तक होगा।

दीया जलाते समय पढ़ें ये मंत्र
शनिदेव के नाम का दीया पीपल के पेड़ नीचे जलाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और साथ ही मन को शांति मिलती है।

ॐ शं शनैश्चराय नमः
माना जाता है कि इस मंत्र के जाप का शांत मन से जाप किया जाए तो शनिदेव प्रसन्न होकर सारे दुख हर लेते हैं। इस मंत्र का जाप 11, 21 या फिर 108 बार किया जा सकता है। आज का दिन विशेष है तो कोशिश करें कि इस मंत्र का जाप 108 बार ही किया जाए।

इस दिशा में जलाएं शनि जयंती का दीया
वास्तु शास्त्र की मान्यता के हिसाब से शनिदेव की पूजा करते समय पश्चिम दिशा शुभ मानी जाती है। इसी दिशा की ओर मुंह करके ही दीया जलाना चाहिए। मान्यता है कि आज शाम को चार जगह दीया जलाना चाहिए। शनि मंदिर और पीपल के पेड़ के नीचे तो दीया जरूर ही जलाएं। साथ ही हनुमान मंदिर और घर के मुख्य द्वार पर भी सरसों के तेल का दीया जलाकर भगवान शनिदेव को मन ही मन याद करें और ऊपर बताए गए मंत्र का जाप करें।

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