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पुराना AC भी देगा नई जैसी ठंडक, बस अपनाएं ये आसान मेंटेनेंस टिप्स

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गर्मी जैसे-जैसे बढ़ती है, पुराने AC का असली टेस्ट शुरू हो जाती है. कई लोगों की शिकायत होती है कि AC चल तो रहा है, लेकिन पहले जैसी ठंडक नहीं दे रहा. कमरे को ठंडा होने में बहुत समय लग रहा है या फिर AC बस हवा फेंक रहा है, ठंडक नहीं.

अच्छी बात ये है कि ज्यादातर मामलों में इसका समाधान आसान होता है, बस थोड़ी समझ और सही मेंटेनेंस की जरूरत होती है.

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कार की तरह AC की भी रेग्यूलर सर्विस
सबसे पहले बात करते हैं सर्विसिंग की. अगर आपका AC एक-दो साल पुराना है और आपने हर साल सर्विस नहीं करवाई है, तो ठंडक कम होना लगभग तय है. AC के अंदर धूल, मिट्टी और गंदगी जमा हो जाती है, जिससे एयरफ्लो कम हो जाता है और कूलिंग पर असर पड़ता है.

इसलिए हर सीजन की शुरुआत में प्रोफेशनल सर्विस कराना बेहद जरूरी है. सर्विसिंग के दौरान टेक्नीशियन कॉइल्स, फिन्स और ड्रेनेज सिस्टम को साफ करता है, जिससे AC की परफॉर्मेंस वापस बेहतर हो जाती है.

फिल्टर क्लीनिंग
अब बात आती है फिल्टर की सफाई की, जो आप खुद भी कर सकते हैं. AC का फिल्टर सबसे जल्दी गंदा होता है क्योंकि वही सारी धूल को रोकता है. अगर फिल्टर चोक हो गया, तो हवा ठीक से पास नहीं हो पाएगी और ठंडक कम हो जाएगी.

पीक समर में आपको हर 10-15 दिन में फिल्टर निकालकर पानी से धोना चाहिए और पूरी तरह सूखने के बाद ही वापस लगाना चाहिए. ये छोटा सा काम आपके AC की कूलिंग को काफी हद तक सुधार सकता है.

गैस की इश्यू
कूलिंग कम होने का एक बड़ा कारण गैस भी होता है. AC में जो रेफ्रिजरेंट गैस होती है, वही असल में हवा को ठंडा करती है. अगर गैस कम हो गई है या लीक हो रही है, तो AC चाहे जितना चलाएं, ठंडक नहीं मिलेगी.

ऐसे में आपको किसी एक्सपर्ट से गैस चेक करवानी चाहिए. अगर गैस कम है, तो उसे रिफिल किया जाता है, लेकिन उससे पहले ये देखना जरूरी है कि कहीं लीकेज तो नहीं है. अगर लीक है और आपने सिर्फ गैस भरवा ली, तो कुछ ही समय में वही समस्या फिर से आ जाएगी.

गैस लीक
लीकेज की समस्या को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलती होती है. पाइप्स या कॉइल्स में छोटी सी दरार भी गैस को धीरे-धीरे बाहर निकाल सकती है. एक अच्छा टेक्नीशियन पहले लीकेज ढूंढेगा, उसे ठीक करेगा और उसके बाद ही गैस भरेगा. इससे आपका AC लंबे समय तक सही कूलिंग देगा.

एक और अहम चीज है आउटडोर यूनिट की सफाई. कई लोग सिर्फ इंडोर यूनिट पर ध्यान देते हैं, जबकि आउटडोर यूनिट भी उतनी ही जरूरी है. अगर आउटडोर यूनिट पर धूल या कचरा जमा है या उसके आसपास हवा का सही फ्लो नहीं है, तो हीट बाहर नहीं निकल पाएगी और कूलिंग कमजोर हो जाएगी. कोशिश करें कि आउटडोर यूनिट खुली जगह पर हो और उसके आसपास कोई रुकावट न हो.

कमरे की कंडीशन कैसी हो?
इसके अलावा, कमरे की कंडीशन भी बहुत मायने रखती है. अगर कमरे में बहुत ज्यादा धूप आती है या दरवाजे-खिड़कियां ठीक से बंद नहीं हैं, तो AC को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी. मोटे पर्दे इस्तेमाल करें और कोशिश करें कि ठंडी हवा बाहर न जाए. इससे AC की एफिशिएंसी बढ़ती है. डायरेक्ट सनलाइट आती है तो ब्लैकआउट ब्लाइंड का यूज करना बेहतर होगा.

पुराने AC में एक और ट्रिक काम आती है, थर्मोस्टेट सेटिंग्स को समझदारी से यूज करना. बहुत लोग AC को 16 डिग्री पर सेट कर देते हैं, ये सोचकर कि जल्दी ठंडा होगा. लेकिन इससे कंप्रेसर पर लोड बढ़ता है और बिजली भी ज्यादा खर्च होती है.

24-26 डिग्री का सेटिंग आमतौर पर सही रहता है, जिससे कूलिंग भी अच्छी मिलती है और AC पर दबाव भी कम रहता है.

अगर आपका AC बहुत पुराना है, तो कभी-कभी पार्ट्स की हालत भी खराब हो जाती है, जैसे कंप्रेसर या फैन मोटर. ऐसे में बार-बार छोटी-मोटी रिपेयर कराने से बेहतर है कि एक बार सही से जांच करवा लें कि कौन सा पार्ट बदलने की जरूरत है.

ये समझना जरूरी है कि AC मशीन है और उसे सही देखभाल चाहिए. समय पर सर्विसिंग, साफ फिल्टर, सही गैस लेवल और लीकेज फिक्सिंग, इन सब चीजों का ध्यान रखेंगे, तो आपका पुराना AC भी नई जैसी ठंडक दे सकता है. थोड़ी सी मेहनत और सही जानकारी से आप बिना नया AC खरीदे भी इस गर्मी में आराम से ठंडक का मजा ले सकते हैं.

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