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वास्तु विज्ञान के अनुसार घर के कोनों का सही उपयोग बढ़ाता है सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि

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वास्तु विज्ञान के अनुसार, घर की दीवारें और उनके कोने ऊर्जा के सबसे बड़े केंद्र होते हैं. यदि ये कोने खाली, अंधेरे या गंदे हों, तो वहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है. इन कोनों में नकारात्मकता बढ़ने लगती है. जिस तरह शरीर में रक्त का संचार रुकने से बीमारी होती है, वैसे ही कोनों का वास्तु बिगड़ने से घर में कलह और कंगाली आती है. आइए जानते हैं कि कोनों को कैसे सजाएं कि वे आपके लिए सौभाग्य खींचने वाले चुंबक बन जाएं.

ईशान कोण
उत्तर-पूर्व का कोना खाली रखना सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है. यहां ऊर्जा सबसे शुद्ध होती है, इसलिए यहां मंदिर स्थापित करें या जल से भरा कलश रखें.  इससे घर में सकारात्मक विचारों का संचार होता है.  बच्चों की बुद्धि तेज होती है.

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नैऋत्य कोण
दक्षिण-पश्चिम कोना घर के मुखिया का स्थान है.  इसे खाली छोड़ने से आत्मविश्वास में कमी आती है. यहां भारी सामान या ठोस सजावटी वस्तुएं रखने से जीवन में स्थिरता आती है, इससे घर का नेतृत्व मजबूत बना रहता है.

आग्नेय कोण
दक्षिण-पूर्व का कोना अग्नि का स्थान है. इसे खाली या ठंडा रखने से घर के सदस्यों में आलस्य बढ़ता है. यहाँ एक लाल बल्ब, किचन या तांबे की वस्तु रखने से उत्साह बना रहता है. इससे आर्थिक तंगी दूर होती है.

उत्तर दिशा
उत्तर दिशा का कोना खाली रहने पर धन संचय में बाधा आती है. यहां लक्ष्मी-कुबेर की प्रतिमा या हरे पौधे लगाने से आय के नए रास्ते खुलते हैं. यह कोना जितना व्यवस्थित रहेगा, व्यापार और नौकरी में उतनी ही वृद्धि होगी.

वायव्य कोण
उत्तर-पश्चिम कोना चंद्रमा और वायु से जुड़ा है. इसे खाली छोड़ने से मानसिक अशांति और पड़ोसियों से विवाद हो सकता है.  यहाँ कोई चलती हुई वस्तु (जैसे विंड चाइम) या सफेद शोपीस रखने से समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ता है.

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