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कार बाजार में नई क्रांति की आहट, यूरोप-भारत FTA डील पर इंडस्ट्री लीडर्स ने रखी बात

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नईदिल्ली 

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA Deal) ने देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में नई उम्मीद जगा दी है. यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, रोजगार और तकनीक के नए रास्ते खोलने वाला माना जा रहा है. इस डील से न केवल यूरोप से आने वाली इंपोर्टेड कारें कम कीमत में भारत में उपलब्ध होंगी बल्कि भारत से भी एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा. ऑटो इंडस्ट्री के बड़े दिग्गज इसे इंडस्ट्री के डेवलपमेंट में अहम कदम बता रहे हैं.

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क्या कहते हैं टाटा के MD

SIAM के अध्यक्ष और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी व सीईओ शैलेश चंद्रा का कहना है कि "भारत-ईयू एफटीए ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगा. उनका मानना है कि यह समझौता बाजार को खोलने और देश में मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के बीच बैलेंस बनाए रखेगा. इससे एक तरफ ग्लोबल ब्रांड्स की भागीदारी बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर घरेलू ऑटो इंडस्ट्री में निवेश और रोजगार के नए अवसर बनेंगे. इसके अलावा ग्राहकों को भी ज्यादा विकल्प मिलने की उम्मीद है."

ग्लोबल ब्रांड्स के लिए भरोसेमंद माहौल

स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया के एमडी और सीईओ पियूष अरोड़ा ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि, "यह भारत और यूरोप के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा. उनके मुताबिक यूरोपीयन यूनियन भारत के बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स में से एक है और यह करार दोनों ओर की अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाएगा. उन्होंने कहा कि क्लीन और स्टेबल ट्रेड नियमों से भारतीय ग्राहकों के लिए यूरोपीय कारों के ज्यादा मॉडल लाने की संभावनाएं बनेंगी. लंबे समय में इससे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, कैपेसिटी डेवलपमेंट और ऑटो इकोसिस्टम में निवेश को बढ़ावा मिलेगा."

कम्पटीशन नहीं… बल्कि फायदे का सौदा

महिंद्रा ग्रुप के सीईओ और एमडी डॉ. अनिश शाह ने इसे सिर्फ टैरिफ में कटौती से कहीं ज्यादा बताया है. उनके मुताबिक यह समझौता भारत के लिए इकोनॉमिक ग्रोथ की अगली लहर साबित हो सकता है, जो बीते कई सालों में किए गए नीतिगत सुधारों को और मजबूत करेगा. डॉ. शाह का कहना है कि इस एफटीए की सबसे बड़ी खासियत इसका बैलेंस्ड होना है. एक तरफ यह भारतीय बाजार को यूरोपीय कंपनियों के लिए खोलता है, वहीं दूसरी ओर घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के फायदों को भी सुरक्षित रखता है. महिंद्रा ग्रुप इसे कम्पटीशन नहीं, बल्कि देश के ऑटो सेक्टर के लिए फायदे का सौदा मानता है.

टू-व्हीलर इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक मौका

हीरो मोटोकॉर्प के सीईओ हर्षवर्धन चिताले ने इस समझौते को एक ऐतिहासिक पल बताया. उनके अनुसार यह सिर्फ व्यापारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदारी है जो मजबूत अर्थव्यवस्थाओं की नींव रखेगी. उन्होंने कहा कि इस करार से भारतीय टू-व्हीलर कंपनियों को यूरोपीय बाजारों में ‘मेक इन इंडिया’ प्रोडक्ट को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा. साथ ही रेगुलेटरी सपोर्ट, रिसर्च, इनोवेशन और ग्लोबल वैल्यू चेन में गहरी भागीदारी को भी बल मिलेगा.

इंडियन इंडस्ट्री को ग्लोबल प्लेटफॉर्म

टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन सुदर्शन वेणु ने भी इस एफटीए को भारतीय उद्योग के लिए बड़ा मील का पत्थर बताया. उन्होंने कहा कि, "ऐसे समझौते केवल टैरिफ कम नहीं करते, बल्कि पूरे बिजनेस माहौल को बदल देते हैं. इससे सप्लाई चेन मजबूत होती है और भारतीय कंपनियों को ग्लोबल लेवल पर कम्पटीशन करने का मौका मिलता है. टीवीएस अब नॉर्टन जैसे ब्रांड्स के साथ कंपनी यूरोप और अन्य बाजारों में नए अवसर तलाशने पर फोकस करेगी."

क्या हुई है डील

भारत सरकार और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई इस डील का एक तगड़ा असर ऑटो इंडस्ट्री पर देखने को मिलेगा. यूरोपीय यूनियन का कहना है कि, यूरोप में बनी गाड़ियों पर भारत में लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है. इसके लिए 2.5 लाख यूनिट का कोटा तय किया गया है. यानी फिलहाल ये छूट 2.5 लाख कारों पर ही लागू होगा. यानी आने वाले समय में इंपोर्टेड यूरोपियन कारें काफी कम कीमत में भारत में उपलब्ध होंगी. हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों को इस डील में अगले 5 साल तक के लिए बाहर रखा गया है. 

कुल मिलाकर, भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को ऑटो सेक्टर के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में देश की ऑटो इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है. इसके अलावा ग्राहकों को भी कम कीमत में ज्यादा बेहतर ऑप्शन मिलेगा. 

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