अनिल अंबानी की RNEL भी दिवालिया होने की कगार पर, कभी वायुसेना को बेचे थे रफाल

नई दिल्ली
 अनिल अंबानी (Anil Ambani) के दिन आजकल ठीक नहीं चल रहे हैं। अनिल अंबानी की कंपनियां बर्बादी की ओर बढ़ रही हैं। कभी दुनिया के टॉप 10 अरबपतियों की लिस्ट में शाामिल अनिल अंबानी इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। एक के बाद एक अनिल अंबानी की कंपनियां कंगाल होती जा रही हैं, उनकी कई कंपनियां औने-पौने दामों में बिक चुकी हैं। अंबानी को कभी सबसे अमीर बनाने वाली कंपनी रिलायंस कैपिटल भी अब बिकने की कगार पर पहुंच चुकी है। अब एक और कंपनी दिवालिया होकर इसी राह पर है। यह कंपनी रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड (RNEL) है।

यह वही कंपनी (Reliance Naval and Engineering Limited) है जिसके जरिए अनिल अंबानी ने डिफेंस सेक्टर में कदम रखा था। रफ़ाल को बनाने वाली कंपनी डसॉ एविएशन ने साल 2017 में अनिल अंबानी के मालिकाना हक वाली रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड को अपना ऑफसेट साझेदार बनाया था। यह वही कंपनी है, जिससे भारत ने वायुसेना के लिए 36 रफाल खरीदे थे। हालांकि उस दौरान इसे लेकर सवाल भी उठाए गए थे।

कर्ज के जाल में फंसे अनिल अंबानी

अनिल अंबानी कर्ज के जाल में फंस चुके हैं। कभी इंफ्रास्ट्रक्चर, पॉवर प्रोडक्शन एंड सप्लाई, होम फाइनेंस, पोत निर्माण, कम्यूनिकेशन जैसे कई कारोबार में उनकी तूती बोलती थी। लेकिन आज हाल ये है कि उनकी कई कंपनियां औने-पौने दामों में बिक चुकी हैं। बता दें आरएनईएल की पैरेंट कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर है। अनिल अंबानी के ग्रुप ने साल 2015 में पीपावाव डिफेंस एंड ऑफशोर इंजीनियरिंग लिमिटेड को खरीदा था। इसका नाम बदलकर बाद में रिलायंस डिफेंस एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड कर दिया गया। इस ग्रुप का पहला बड़ा सौदा रफ़ाल डील है। फ्रांसीसी कंपनी डसॉ ने रिलायंस के साथ एक जॉइंट वेंचर शुरू किया था।

खुद को दिवालिया घोषित कर चुके अंबानी

साल 2020 में चीन के बैंकों के कर्ज से जुड़े एक विवाद में इंग्लैंड के हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अनिल अंबानी ने माना था कि वह दिवालिया हैं और कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं। अनिल अंबानी के वकील ने उनकी नेटवर्थ जीरो बताई थी। अनिल अंबानी की आरएनईएल की हालत खस्ता है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी की शेयरहोल्डिंग के मुताबिक़ मार्च 2023 तक आरएनईएल में प्रमोटर्स यानी अनिल अंबानी की कोई हिस्सेदारी नहीं थी, जबकि इसमें सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी का 7.93 फ़ीसदी हिस्सा था।

रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस कैपिटल भारी घाटे से गुजर रही है लेकिन इसकी कीमत 2018 में 93,851 करोड़ रुपये थी। लेकिन अब यह लगातार घाटे में जा रही है, जिसके कारण अब इसे बेचने की तैयारी चल रही है। रिलायंस कैपिटल को खरीदने और पुनर्जीवित करने की योजना हिंदुजा समूह की फर्म इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स लिमिटेड (IIHL) द्वारा दी गई है। ये दूसरे दौर में अकेली बोली लगाने वाली कंपनी थी और इसने 9661 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बोली लगाई थी।

रिलायंस कैपिटल के 99 प्रतिशत ऋणदाताओं ने बायआउट के लिए हिंदुजा समूह के नेतृत्व वाले IIHL समूह के पक्ष में मतदान किया है। हिंदुजा ग्रुप अनिल अंबानी की कंपनी का अधिग्रहण करने के अलावा कंपनी के 500 करोड़ रुपये के कैश बैलेंस का भी अधिग्रहण करेगा।

जहां कुछ साल पहले रिलायंस कैपिटल की कीमत लगभग 1 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं हिंदुजा बंधुओं की कुल संपत्ति 1,24,250 करोड़ रुपये है। हालांकि IIHL समूह और रिलायंस कैपिटल के ऋणदाताओं द्वारा सौदे की अंतिम औपचारिकताओं को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।

यह डील मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, जिन्होंने कई साल पहले खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था। उन्होंने रिकॉर्ड पर कहा था कि एक समय भारत के प्रमुख व्यवसायी होने के बावजूद उनकी कुल संपत्ति वर्तमान में शून्य है। कंपनी की बिक्री के बाद ऋणदाताओं को 10,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। इससे उनका लगभग 65 प्रतिशत निवेश वापस मिल जाएगा।