उत्तरप्रदेश

बीजेपी-सपा पर मायावती का मिलीभगत का आरोप, कहा-चुनाव को नफरती रंग देना चाहती हैं दोनों पार्टियां

लखनऊ
यूपी चुनाव में अपने समीकरण दुरुस्‍त करने के लिए हर राजनीतिक दल जी-जान से जुटा है। दलों और नेताओं के बीच आरोप-प्रत्‍यारोप का दौर जारी है। इस बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने भाजपा और सपा पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए दोनों पर यूपी के चुनाव को नफरती रंग देने की कोशिश का आरोप लगाया है। बसपा चीफ ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि चुनाव में जिस तरह से धर्म और जाति की राजनीति हावी है उससे लगता है कि यह सब सपा और बीजेपी की अंदरुनी मिलीभगत के तहत ही हो रहा है। उन्‍होंने जनता से सतर्क रहने की अपील की और लिखा कि भाजपा-सपा चुनाव को हिन्‍दू-मुस्लिम और जातीय नफरती रंग देना चाहती हैं। इसके पहले सु्प्रीमो मायावती के निर्देश पर बसपा ने यूपी चुनाव के लिए शुक्रवार को प्रत्याशियों की एक और सूची जारी की है। इस सूची में 53 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गई है। इसके साथ ही मायावती ने चौथे चरण की ज्यादातर सीटों पर उम्मीदवारों की लिस्ट फाइनल कर दी। इससे पहले मायावती ने गुरुवार को 59 नए टिकट घोषित किए थे जिसमें दो पुराने प्रत्याशियों को बदल कर दो नए उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। गौरतलब है कि मायावती दो फरवरी को आगरा में रैली कर बसपा के चुनाव प्रचार अभियान का आगाज करने जा रही हैं। हालांकि, कोरोना की वजह से चुनाव आयोग ने फिलहाल नेताओं को जनसभा या रोड शो करने की इजाजत नहीं दी है। 25 जनवरी को बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने इसकी जानकारी देते हुए कू पर लिखा था-''अवगत कराना है कि दिनांक 2 फरवरी 2022 को बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री माननीया बहन कु. मायावती जी आगरा में कोविड नियमों का पालन करते हुए जनसभा को  संबोधित करेंगी। जनसभा का समय, स्थान और आगामी जनसभाओं की सूचना मीडिया बंधुओं को शीघ्र उपलब्ध कराई जाएगी।''

अब तक प्रचार से दूर रहीं मायावती
उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती ने इस बार विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार का आगाज नहीं किया है। चुनाव तारीखों के ऐलान से पहले जहां बीजेपी और सपा ने कई बड़ी रैलियां कीं तो मायावती इस दौरान शांत रहीं। मायावती की निष्क्रियता को लेकर उनके वोटर्स ही नहीं राजनीतिक जानकार भी हैरान हैं। हाल ही में कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस पर हैरानी जताते हुए तंज कसा था कि मायावती बीजेपी के दबाव में प्रचार नहीं कर रही हैं।