इंदौर

सावन का तीसरा सोमवार: महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़

उज्जैन
महाकाल की नगरी उज्जैन में तीसरे सोमवार को उत्सव का माहौल है। सुबह से ही मंदिर के बाहर भक्तों की कतार लगी है। भीड़ की वजह से सभी भक्तों के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए गए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह भी महाकाल मंदिर में दर्शन करने पहुंचीं। दोपहर एक बजे से मंदिर में प्रवेश बंद कर दिया गया। अब तक 13 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए थे।

शाम 4 बजे बाबा महाकाल की शाही सवारी निकलना शुरू हो गई। मंदिर से सवारी शिप्रा नदी के रामघाट पर पहुंची। यहां से सवारी हर सिद्धि मंदिर पहुंची। यहां शिव-शक्ति का मिलन किया गया। पूजन के बाद यहां से पालकी वापस महाकाल मंदिर पहुंची। पालकी में करीब 500 से 600 लोग ही मौजूद रहे। बारिश ने भी बाबा महाकाल का स्वागत किया।

इसके पहले तड़के महाकाल की भस्मारती में बेलपत्रों से बनी विशेष माला अर्पित की गई। भांग, चंदन, फूल और वस्त्र आदि से भगवन महाकालेश्वर का आलौकिक श्रृंगार किया गया। इसी दौरान गर्भ गृह के सामने वाले नंदी हाल को भी फूलों से सजाया गया।

तीसरे सोमवार को बाबा के दर्शन के लिए सुबह 3 बजे से ही भक्तों की लाइन लग गई। कोविड प्रोटोकॉल के साथ सुबह 5 बजे से भक्तों के दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया और पूरा मंदिर महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आए भक्तों के लिए पिछले दो सोमवारों की तरह इस बार भी फ्री फॉर आल कर दिया गया है।

पंडित संजय शर्मा पंडित ने बताया कि भगवान महाकालेश्वर की श्रावण भाद्रपद माह में तीसरे सोमवार को भगवान श्री चन्द्रमौलीश्वर चांदी की पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। श्री मनमहेश हाथी पर विराजित होकर भक्तों को दर्शन देंगे। कोविड के प्रोटोकॉल के तहत श्रावण माह की तीसरी सवारी में भी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा।

भगवान महाकाल की सवारी शासकीय सलामी के बाद शाम 4 बजे मंदिर प्रांगण से निकाली गई। श्रद्धालु महाकाल सवारी को www.mahakaleshwar.nic.in देख सकते हैं। महाकाल की सवारी मंदिर के मुख्य द्वार से बड़ा गणेश मंदिर होते हुए हरसिद्धि पाल नरसिंह घाट से क्षिप्रा नदी पहुंचेगी। यहां पूजन के बाद रामानुजकोट आश्रम, हरिद्धि द्वार होते हुए वापस मंदिर लौटेगी। महाकाल की सवारी में पुजारी, पंडे और कहार को ही शामिल करने की अनुमति मिली है।

अब श्रावण भादौ मास की प्रथम छह सवारी में भगवान महाकाल के सिर्फ दो मुखारविंद चंद्रमौलेश्वर व मनमहेश को शामिल किया जाएगा। बाकी पांच मुखारविंद 6 सितंबर को निकलने वाली शाही सवारी में एक साथ बैलगाड़ी पर निकाले जाएंगे।

उल्‍लेखनीय है कि महाकाल मंदिर में रविवार को अवकाश का दिन होने से देशभर से भक्त भगवान महाकाल के दर्शन करने पहुंचे। सुबह 5 बजे से शुरू हुआ दर्शन का सिलसिला रात 9 बजे तक चला। इस दौरान 30 हजार से अधिक भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन किए।