भोपाल

सरकार का बड़ा फैसला, एक करोड़ रुपए से अधिक वाले निर्माण कार्य पीआईयू विंग करेगा

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प्रदेशभर में होने वाले निर्माण कार्यों में आ रही गड़बड़ियों की शिकायत को देखते हुए मप्र सरकार ने अहम निर्णय लिया है। अब प्रदेश में एक करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले सभी निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग की पीआईयू विंग से कराए जाएंगे। अभी कई ऐसी एजेंसियां निर्माण कार्य कर रही हैं जो इनके लिए पात्र नहीं हैं।

प्रदेश में सरकारी निर्माण एजेंसियों द्वारा निर्माण कार्यों में की जाने वाली गड़बड़ी और बंदरबांट को रोकने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था तय कर दी है। इसमें यह तय हुआ है कि अब प्रदेश भर में एक करोड़ रुपए से अधिक लागत पर होने वाले निर्माण कार्यों के लिए निर्माण एजेंसी लोक निर्माण विभाग की पीआईयू विंग होगी। इससे काम की गुणवत्ता भी बढ़ेगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर गड़बड़ी किए जाने के बाद जिम्मेदारी भी तय की जा सकेगी। पिछले कुछ सालों से दूसरी निर्माण एजेंसियों ने बड़े निर्माण कार्य अपने आधिकारिक क्षेत्र से बाहर जाकर करना शुरू कर दिए थे।

प्रदेश में इंदौर विकास प्राधिकरण, भोपाल विकास प्राधिकरण, ग्वालियर विकास प्राधिकरण, जबलपुर विकास प्राधिकरण समेत कई ऐसे विकास प्राधिकरण हैं जहां के सीईओ और इंजीनियर अपने शहर के विकास के बजाय दूसरे जिलों में कालेज, मेडिकल कालेज और अन्य सरकारी इमारतों को बनाने का काम कर रहे हैं और निर्माण के लिए अधिकृत विभाग पीआईयू के पास कोई काम ही नहीं है।

अभी स्थिति यह है कि होशंगाबाद में सीपीए ने कालेज का भवन बना दिया जबकि राजधानी परियोजना प्रशासन (सीपीए) के अंतर्गत राजधानी क्षेत्र ही उसका दायरा है। इसी तरह सागर का मेडिकल कालेज हाउसिंग बोर्ड ने बनाया है। कुछ जिलों में मंडी बोर्ड के अधीन काम करने वाली कृषि उपज मंडी, विकास प्राधिकरण समेत अन्य ऐसी एजेंसियां काम कर रही हैं जो उनके कार्यक्षेत्र से बाहर है और उनके विभाग के अफसरों की तकनीकी योग्यता पर भी सवालिया निशान उठे हैं।

सरकारी निर्माण कार्यों में घुसने वाली एजेंसियों ने कमीशनखोरी के चक्कर में सरकार को चूना लगाने का काम शुरू कर रखा है। जिन विभागों द्वारा काम कराए जा रहे हैं, उनमें से अधिकांश विभागों के जिम्मेदार निर्माण कार्य की लागत को लेकर एस्टीमेट तो पीआईयू से बनवाते थे लेकिन बाद में काम दूसरी निर्माण एजेंसी को सौंपते रहे हैं। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में कमी की शिकायतें आती रही है।