राजनीति

गुजरात: चुनाव से एक साल पहले ही बिखरा कांग्रेस का कारवां, हार्दिक भी ताकत की बजाय बने बोझ

नई दिल्ली
2017 के गुजरात चुनाव से पहले कांग्रेस ने जिन युवा नेताओं पर खासा भरोसा जताया था वे इतने समय में खुद को कुछ खास साबित नहीं कर पाए। इनमें अलपेश ठाकोर, जिगनेश मेवाणी और हार्दिक पटेल शामिल थे। एक ओर जहां उत्तर गुजरात के अलपेश ठाकोर ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का हाथ थाम लिया वहीं जिग्नेश मेवाणी पार्टी की राजनीति में शून्य योगदान के साथ स्वतंत्र कांग्रेस समर्थित विधायक बने रहे। इसके अलावा  पिछले साल पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए गए सबसे हाई प्रोफाइल हार्दिक पटेल भी अब तक पार्टी के लिए कुछ खास नहीं कर सके हैं। 

गुजरात कांग्रेस में नेतृत्व की कमी
गुजरात में कांग्रेस लंबे समय से नेतृत्व की कमी से जूझ रही है। यहां  राज्य अध्यक्ष अमित चावड़ा और विपक्ष के नेता परेश धनानी दोनों ने इस साल की शुरुआत में स्थानीय निकाय चुनावों में हार के बाद तीसरी बार इस्तीफा दिया था। कोविड -19 की दूसरी लहर के दौरान कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजीव सातव के असामयिक निधन से संकट और बढ़ गया था।

कांग्रेस के कार्यक्रमों से गायब हार्दिक
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस महंगाई और पेगासस जैसे मुद्दों के खिलाफ कई आंदोलनकारी कार्यक्रमों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को जुटाने की कोशिश कर रही है और कई वरिष्ठ नेता इन मुद्दों पर सड़कों पर उतर आए हैं। यहां चावड़ा और धनानी दोनों आगे से लीड कर रहे हैं, जबकि हार्दिक पूरी तरह गायब हैं।

AAP में शामिल होंगे हार्दिक?
दरअसल, हार्दिक पटेल के करीबी सहयोगी अब आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि हार्दिक भी पार्टी बदल सकते हैं। हालांकि, ईटी से बात करते हुए हार्दिक ने ऐसी किसी भी संभावना से साफ इनकार किया और कांग्रेस के प्रदर्शनों में उनकी अनुपस्थिति के लिए व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया। उन्होंने कहा “मेरे लिए कांग्रेस छोड़ने का कोई कारण नहीं है। मैं पार्टी नहीं छोड़ रहा हूं।'