राजनीति

सीएए से देश की मुस्लिम आबादी प्रभावित नहीं होगी: मोहन भागवत

गुवाहाटी
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएए) को लेकर देश में लगातार विरोध हो रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के चीफ मोहन भागवत ने इस मामले पर बड़ा अहम बयान दिया है। गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि, नागरिकता संशोधन अधिनियम, सीएए से देश की मुस्लिम आबादी प्रभावित नहीं होगी। उनका कहना है कि भारत लंबे समय से अपनी अल्पसंख्यक आबादी की देखभाल कर रहा है जबकि पाकिस्तान ऐसा करने में विफल रहा है।

 आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत आज नानी गोपाल महंत द्वारा लिखी "नानी गोपाल महंत पर नागरिकता बहस: असम और इतिहास की राजनीति" नामक पुस्तक का गुवाहाटी में विमोचन किया। इसी मौके पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि, दुनिया में एक भी उदाहरण ऐसा नहीं है कि जिसमें इतनी सारी विविधताएंं इकट्ठा चार हजार साल चलीं, बिना झगड़ा किए चलीं, आपस में मिल-जुलकर चलीं और सब की सब कायम हैं आज भी। राजनीतिक लाभ के लिए दोनों विषयों (सीएए-एनआरसी) को हिन्दू मुसलमान का विषय बना दिया, यह हिन्दू मुसलमान का विषय ही नहीं है
 
उन्होंने कहा कि, ये सिर्फ हमारे यहां हुआ है, क्योंकि बाकी दुनिया का विचार ही ऐसा है। अगर मिलजुल कर रहना है तो ये सारी बातें समरूप होनी पड़ेंगी। लेकिन अलग-अलग भाषा नहीं चलेगी। एक ही भाषा चलेगी। अलग-अलग खान-पान रीति रिजाव नहीं चलेंगे। एक ही प्रकार की होगी। अलग पूजाएं नहीं चलेगी। एक ही पूजा होनी है। वह बताने से होगा अच्छी बात है। मानाने से हो जाए तो अच्छी बात है औऱ मारपीट कर हो जाए तो अच्छी बात है। या फिर ऐसा भेदभाव रखने वालों को समाप्त करके हो तो भी अच्छी बात है। यह चिंतन है।

 आरएसएस के प्रवक्ता ने बताया कि भागवत ने असम के विभिन्न क्षेत्रों तथा अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर एवं त्रिपुरा जैसे अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठकें की। उन्होंने कहा कि इन बैठकों में संगठन से जुड़े विषयों एवं महामारी के दौर में समाज और लोगों के कल्याण के उपायों पर चर्चा हुई। भागवत का बुधवार को कुछ राजनीतिक नेताओं के साथ भी बैठक करने का कार्यक्रम है। असम में दूसरे कार्यकाल के लिए भाजपा के सत्ता में लौटने के बाद भागवत की राज्य की यह पहली यात्रा है।