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यूपी में डाटा सेंटर के जरिए 20 हजार करोड़ का होगा निवेश, मिलेंगी सहूलियतें

 लखनऊ 
उत्तर प्रदेश सरकार अपनी नई डाटा सेंटर नीति के तहत राज्य में 20 हजार करोड़ का निवेश कराएगी। यूपी में तीन डाटा सेंटर पार्क बनाने का लक्ष्य रखा गया है। डाटा सेंटर में निवेश करने वाली कंपनियों को कई तरह की सहूलियत व छूट दी जाएगी। डाटा सेंटर 24 घंटे व रोजाना तीन पालियों में चलाने व महिलाओं को काम करने की छूट होगी। साथ ही उन्हें ओपेन एक्सेस निर्बाध बिजली आपूर्ति की सुविधा दी जाएगी।
 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में आईटी व इलेक्ट्रानिक्स विभाग की नई डाटा सेंटर नीति के मसौदे को मंजूरी दे गई। इस नीति के आने से पहले ही दो कंपनियां ग्रेटर नोएडा में डाटा सेंटर बनाने को तैयार हो गईं हैं। अब राज्य में 250 मेगावाट डाटा सेंटर उद्योग स्थापित किया जाएगा। नीति के पालन के लिए नोडल एजेंसी बनेगी। यह आउटसोर्स प्रोफेशनल्स व सलाहकार के जरिए परियोजना प्रबंधन यूनिट बनाएगी। 200 करोड़ से अधिक की परियोजना  को सशक्त समिति कैबिनेट के सामने ले जाएगी। 

यह मिलेंगी सहूलियतें 
-सालाना ब्याज की 60 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति (अधिकतम पचास करोड़ रुपये)  की मदद 
-मध्य यूपी व पश्चिम यूपी में डाटा सेंटर लगाने पर जमीन पर 25 प्रतिशत व बुंदेलखंड व पूर्वांचल में 50 प्रतिशत लैंड सब्सिडी मिलेगी। यह कुल परियोजना का लागत का अधिकतम 7.5 प्रतिशत या 75 प्रतिशत में  जो भी कम होगा, मान्य होगा। 
– यह सुविधा पहले आने वाली तीन डाटा पार्क को ही मिलेगी। 
इलेक्ट्रिकसिटी ड्यूटी में सौ प्रतिशत की छूट दस सालों तक मिलेगी। 
डाटा सेंटर उद्योग को आवश्यक सेवा प्रदाता के रूप में मानते हुए एस्मा में वर्गीकृत किया जाएगा
– जमीन खरीदने पर स्टांप शुल्क में सौ प्रतिशत छूट मिलेगी
-पहले तीन डाटा सेंटर पार्क को डबल ग्रिड लाइन से बिजली आपूर्ति की जाएगी। इसमें दूसरे ग्रिड की लागत ऊर्जा विभाग वहन करेगा
राज्य से बाहर बिजली आयात पर पांच साल तक ट्रांसमिशन शुल्क में सौ प्रतिशत की छूट मिलेगी। 
डाटा सेंटर जमीन व भवन की लागत छोड़ कर जितना  निवेश करेंगी, उस पर कैपिटल सब्सिडी के रूप में अधिकतम 
20 करोड़ मिलेंगे। 
डाटा सेंटर पार्क के लिए 3.0 व 1.0 (क्रय योग्य) फ्लोर एरिया रेशियो की अनुमति होगी। 
एक मंजिल में फर्श से छत  की ऊंचाई पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। पार्किंग पांच प्रतिशत क्षेत्र तक सीमित रखने की सुविधा होगी। चहारदिवारी 3.6 मीटर ऊंची रखी जा सकेगी।