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भारत का राजचिह्न महज आकृति नहीं, गणतंत्र का है पूरा सार 

 नई दिल्ली 

भारत का राजचिह्न महज आकृति नहीं बल्कि एक ग्रंथ के समान है। यह हमें बुद्ध और युद्ध दोनों की याद दिलाता है। यह एकता, साहस और शक्ति संदेश के साथ यह बताया है कि सत्य ही सर्वोच्च है। दुनिया में शायद ही कोई राजचिन्ह इतना सारगर्भित हो। जानिए भारत के राजचिन्ह से जुड़ी 10 बड़ी बातें-

लायन कैपिटल-

– इस पूरे चिन्ह को कमल के फूल की आकृति के ऊपर उकेरा गया है। यब बड़े स्तंभ पर बनाया गया है, इसे लायन कैपिटल कहा जाता है।
– अशोक स्तंभ तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक द्वारा बनाया गया था।
– यह स्तंभ सारनाथ के पास उस जगह को दर्शाने के लिए बनाया गया था, जहां बुद्ध ने पहला उपदेश दिया था।

अशोक चक्र-

– अशोक चक्र को राष्ट्रध्वज में भी देखा जाता है। यह बौद्ध धर्मचक्र का चित्रण है। इसमें 24 तीलियां हैं।
– अशोक चक्र को कर्तव्य का पहिया भी कहा जाता है। इसमें मौजूद तीलियां मनुष्य के 24 गुणों को दर्शाती हैं।

सत्यमेव जयते-

– राजचिन्ह के निचले हिस्से पर आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' लिखा है। इस आदर्श वाक्य को मुण्डका उपनिषद से लिया गया है।

चार शेर-

– राजचिह्न में चार सिंह हैं। पर इसमें से सिर्फ तीन ही दिखाई देते हैं। एक सिंह की आकृति पीछे छिप जाती है। ये शक्ति, आत्मविश्वास, साहस और गौरव के प्रतीक हैं।

घोड़ा और बैल-

– इसके निचले हिस्से पर एक घोड़ा और बैल है। घोड़े और बैल के बीच में एक पहिया है यानी धर्म चक्र।
– स्तंभ की पूर्व दिशा की ओर हाथी, पश्चिम की ओर बैल, दक्षिण की ओर घोड़ा और उत्तर की ओर शेर है। ये बीच में पहियों से अलग होते हैं।

शाही चिन्ह की ढाल चार भागों में बंटी है-

1. पहले व चौथे भाग में बिट्रेन का प्रतिनिधित्व करते हुए तीन अंग्रेजी शेर हैं।
2. दूसरे भाग में फूलों की मेंड के साथ स्कॉटलैंड का प्रतिनिधित्व करता अनियंत्रित शेर है।
3. तीसरे भाग में उत्तरी आयरलैंड का प्रतिनिधित्व करता क्लैरसच (हार्प) है।
4. ढाल को शाही मुकुट पहने हुए अंग्रेजी शेर और जंजीर से बंधे स्कॉटिश यूनिकॉर्न ने संभाला हुआ है।