भोपाल

पेड़ शिफ्टिंग से इंजीनियर और ठेकेदार हो रहे मालामाल, खुलेआम हो रहा पेड़ों की कटाई

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स्मार्ट सिटी से पेड़ों की शिफ्टिंग के नाम पर राजधानी में खुलेआम पेड़ों का कत्ल हो रहा है। दरअसल कुछ साल पहले इंदौर की एक कंपनी ने लाखों रुपए लेकर बीआरटीएस के 600 पेड़ों की शिफ्टिंग की थी जबकि कुछ ही महीनों में यह पेड़ सूख गए थे। आज भी कई सूखे पेड़ खड़े हैं। एक बाद फिर पेड़ों की शिफ्टिंग के नाम पर स्मार्ट सिटी के करोड़ों रुपए खर्च करके पेड़ों का कत्ल किया जा रहा है।  अभी टीटी नगर क्षेत्र में लगे 770 पेड़ों की शिफ्टिंग होना है। पेड़ों की शिफ्टिंग से अफसर और ठेकेदार मालमाल हो रहे हैं, लेकिन पेड़ एक भी नहीं बच रहे। स्मार्ट सिटी ने पेड़ों की इन शिफ्टिंग का काम इंजीनियर देवेन्द्र तिवारी को सौंपा है।

टीटी नगर क्षेत्र से जिन 80 पेड़ों को चोरी-छुपे कलियासोत डेम के समीप शिफ्ट किया गया था। उनमें से अधिकतर पेड़ सूखने लगे हैं। इस बात से स्मार्ट सिटी के अफसर मुकर रहे हैं। वहीं पर्यावरवणविद् के अनुसार शिफ्टिंग के दौरान मापदंडों का पालन नहीं किया गया। इस कारण पेड़ों के पत्ते मुरझा गए। इनमें से कितने पेड़ पनप पाएंगे फिलहाल यह कहना मुमकिन नहीं है, क्योंहिक पेड़ों की शिफ्टिंग के लिए यह मौसम अुनकुल है।

स्मार्ट सिटी करप्शन का अड्डा बन गई है। होटलों में कार्यशालाएं, प्रतियोगिताएं एवं अन्य आयोजनों के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च हुए। लेकिन मूल काम एक भी पूरा नहीं हुआ। मनमर्जी की भर्तियां और निर्माण कार्याें की जांच की जाए तो बड़ा करप्शन सामने आ सकता है।

शहर के लिंक रोड 1, लिंक रोड़ 2 और लिंक रोड़ 3 के पार्क और सेंट्रलवर्ज पर 15 लाख रुपए खर्च करके शिफ्ट किये गए हरे भरे बड़े-बड़े पेड़ सूख चुके हैं। लिंक रोड 2 पर पेट्रोल पंप के सामने बना उर्जा भवन पार्क में बीआरटीएस कॉरिडोर से उखाड़े गए पेड़ों को यहां शिफ्ट किया गया था। जो अब सूखे झाड़ में तब्दील हो गए हैं। यहीं हाल लिंक रोड 1 और लिंक रोड 3 के सेंट्रलवर्ज और पार्क में शिफ्ट किए गए पेड़ों का भी है।

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