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पिछले साल प्रकाशित की गई NRC अंतिम नहीं,  फिर से जोड़ पकड़ने लगे: असम सरकार

 गुवाहाटी 
कोरोना के संक्रमण से ठीक पहले तक देश में सीएए और एनआरसी को लेकर जमकर सियासी बयानबाजी हुई थी। जैसे-जैसे देश संक्रमण के दौर से उबरता हुआ दिख रहा है वैसे-वैसे ये मुद्दे फिर से जोड़ पकड़ने लगे हैं। कुछ ही दिन पहले बंगाल में बीजेपी के प्रभारी कैलाश विजवर्गीय ने जनवरी तक सीएए लागू करने की बात कही थी, वहीं अब असम सरकार ने गुवाहाटी हाईकोर्ट में कहा है कि अगस्त में प्रकाशित एनआरसी पूरक सूची थी, अभी अंतिम दस्तावेज जारी किया जाना बाकी है। बयानों की कड़ी से एकबात को स्पष्ट होने लगा है कि फिर एकबार इन मुद्दों पर जमकर सियासत होने की उम्मीद है।

राज्य संयोजक हितेश देव सरमा ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय को बताया है कि प्रदेश में पिछले साल अगस्त में प्रकाशित ऐतिहासिक राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) केवल ''पूरक सूची'' थी और अंतिम दस्तावेज अभी जारी किया जाना है। 

सरमा ने अदालत में दिये एक हलफनामे में कहा कि एनआरसी की ''पूरक सूची'' में 10 हजार से अधिक नामों को या तो गलती से शामिल कर लिया गया या निकाल दिया गया और दस्तावेज से 4,800 ''अयोग्य लोगों'' के नाम हटाने के लिये जरूरी आदेश जारी किए जा चुके हैं। 

अंतिम एनआरसी 31 अगस्त 2019 को जारी की गई थी, जिसमें 19,06,657 लोगों के नाम नहीं थे। कुल 3,30,27,661 आवेदकों में से 3,11,21,004 लोगों के नाम सूची में शामिल किये गए थे।

आपको बता दें कि रहीमा बेगम नामक महिला ने खुद को विदेशी घोषित करने के नलबाड़ी जिला विदेशी अधिकरण के आदेश को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की थी, जिसपर गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेशानुसार यह हलफनामा दायर किया गया था।

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