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खुलासा: भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के पैसों से हुई टेरर फंडिंग: NIA 

चंडीगढ़ 
 खालिस्तानी आतंकवादी संगठन भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी से अर्जित किए गए पैसे को टेरर फंडिंग के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. NIA (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) ने नारको टेरर फंडिंग के एक मामले में चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें इस बात का खुलासा हुआ है. इस चार्जशीट में भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन 'खालिस्तान लिबरेशन फोर्स' (KLF), पाकिस्तान के ड्रग माफियाओं, दुबई के एक हवाला कारोबारी और आईएसआई के खतरनाक नेटवर्क का खुलासा हुआ है जो पंजाब में फिर से आतंकवाद के जिन्न को जिंदा करने की कोशिश में जुटा है. 

यह खुलासा शुक्रवार को मोहाली स्थित एनआईए की विशेष अदालत में खालिस्तान लिबरेशन फोर्स से संबंधित नारको टेरर केस की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में किया गया है. एनआईए ने यह चार्जशीट खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के 'नारको टेररिस्ट' धर्मिन्दर सिंह उर्फ धन्ना के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी और  NDPS एक्ट की धारा 25 ,27 ,27-A और 29 के तहत दर्ज मामले में दाखिल की है. 

NIA की जांच में खुलासा

एनआईए की जांच में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान से संचालित KLF के आतंकवादी जसवीर सिंह सामरा के जरिए पंजाब में हेरोइन तस्करी कर रहे थे. सामरा KLF के एक अन्य आतंकवादी धर्मिन्दर सिंह उर्फ धन्ना के जरिये हेरोइन, स्थानीय तस्करों को बेचता था. हेरोइन बेचकर  इकट्ठा किया गया पैसा  सामरा के खाते में जमा होता था. 

सामरा, हवाला के जरिये पैसे को KLF तक पहुंचाने का काम करता था जिसे बाद में टेरर फंडिंग के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा रहा था. एनआईए ने इस नारको -टेरर मामले की पहली चार्जशीट 29 मई 2020 को दाखिल की थी. इसमें जसवीर सिंह सामरा सहित कुल नौ तस्करों और आतंकवादियों को आरोपी बनाया गया था. आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी और यूएपीए की धारा 13, 17, 18 और 40 तथा एनडीपीएस की धारा 21, 25, 27 ए और 29 के तहत मामला दर्ज है. 

इन सभी आतंकवादियों और तस्करों को अमृतसर के तरसिक्का पुलिस स्टेशन में 31 मई 2020 को दर्ज की गई एफआईआर संख्या 75 के तहत गिरफ्तार किया गया था. 31 मई 2020 को गिरफ्तार सामरा और दूसरे आतंकवादियों के कब्जे से  500 ग्राम हेरोइन और 1,20,000 की नकदी भी बरामद की गई थी. 

इस नार्को -टेरर फंडिंग मामले में खालिस्तान लिबरेशन फोर्स प्रमुख हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी और दुबई के अंतर्राष्ट्रीय नशा तस्कर और हवाला कारोबारी जसमीत सिंह हकीमज़ादा के नाम उजागर हुए हैं. हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी की इसी साल जनवरी में मौत हो चुकी है.

ड्रोन से होती है नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी
केएलएफ के दर्जनभर आतंकवादियों की गिरफ्तारी के बावजूद भी इस आतंकवादी संगठन की भारत विरोधी गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं. हाल ही में भारतीय सीमा पर देखे गए पाकिस्तान के कई ड्रोन इस बात के सबूत हैं कि KLF भारत में लगातार नशीले पदार्थों और अवैध हथियारों की खेप पहुंचाने की कोशिश कर रहा है. 
 
अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप न केवल पंजाब बल्कि जम्मू कश्मीर के लिए भी भेजी जा रही है. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक दिसंबर के पहले हफ्ते में ही अमृतसर से सटी भारत पाक सरहद पर, पांच बार पाकिस्तानी ड्रोन को भारतीय सीमा में घुसते देखा गया है. 

सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि आतंकवादियों और तस्करों के गिरोह ने अमृतसर के रामदास और गग्गोमहल क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप पहुंचाई है. एक दिसंबर को कोट रजादा क्षेत्र में भी पाकिस्तानी ड्रोन घुसने की खबर आई थी. हथियारों और नशे की खेप का पता लगाने के लिए पंजाब पुलिस और बीएसएफ इन इलाकों में सघन सर्च अभियान चला रही है. 

इससे पहले सितंबर माह में तरनतारन में भी ड्रोन का इस्तेमाल करके हथियार भारतीय सीमा में पहुंचाए गए थे. इन हथियारों को पहुंचाने के लिए पाकिस्तान के आठ ड्रोन भारतीय सीमा में घुसे थे. हालांकि इस मामले में KLF के बजाय खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का नाम सामने आया था. 

बीएसएफ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सर्दियों में जब भारत पाक सीमा पर धुंध छाने लगती है तो आतंकवादी और तस्कर इसका फायदा उठाकर भारतीय सीमा में नशीले पदार्थ और अवैध हथियार पहुंचाने की कोशिश करते हैं. 

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