देश

जल्द नहीं मिलने वाली Pfizer, मॉडर्ना वैक्सीन की पर्याप्त खुराक

नई दिल्ली
ट्रायल्स के दौरान 90 प्रतिशत से भी ज्यादा कारगर पाई गई Pfizer की वैक्सीन को शून्य से 70 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान पर रखना भारत समेत तमाम देशों के लिए बड़ी चुनौती है। इसके अलावा फाइजर और मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन भारत को जल्द मिलने की संभावना भी नहीं है। सरकार ने भी इसे स्वीकार किया है लेकिन उसे उम्मीद है कि देश में ही जिन वैक्सीन का परीक्षण चल रहा है, वही पर्याप्त हो जाएंगी। देश में अभी कोरोना की कुल 5 वैक्सीनों का ट्रायल अगल-अलग चरण में है।

देश में 5 वैक्सीन के ट्रायल अलग-अलग चरण में
नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉक्टर वीके पॉल ने देश में परीक्षण के अलग-अलग चरणों में पहुंचे 5 टीकों को लेकर उम्मीद जताई और कहा कि इन टीकों की खुराक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि सीरम इंस्टिट्यूट के ऑक्सफर्ड टीके का तीसरे चरण का परीक्षण लगभग पूरा होने को है, जबकि भारत बायोटेक और आईसीएमआर की तरफ से बनाई जा रही वैक्सीन का तीसरे चरण का परीक्षण पहले ही शुरू हो चुका है। पॉल ने कहा कि जाइडस कैडिला का देश में विकसित एक अन्य टीका दूसरे चरण का परीक्षण पूरा कर चुका है। रूस की स्पूतनिक-V वैक्सीन का भारत में फेज-2 का ट्रायल पूरा हो चुका है। मॉडर्ना और फाइजर कंपनियों के टीकों के बारे में पॉल ने कहा, 'हम घटनाक्रम को देख रहे हैं। उन्होंने इनके शुरुआती नतीजों की घोषणा की है और इन्हें नियामक की मंजूरी नहीं मिली है।'

फाइजर की वैक्सीन का स्टोरेज बड़ी चुनौती
सरकार ने मंगलवार को कहा कि Pfizer कंपनी की कोरोना वैक्सीन का माइनस 70 डिग्री सेल्सियस से भी कम के तापमान पर स्टोरेज एक बड़ी चुनौती है। लेकिन यदि भारत इस वैक्सीन को हासिल करता है तो सरकार उससे जुड़ी संभावनाओं की समीक्षा कर रही है। इसके साथ ही सरकार ने कहा कि कोविड-19 टीका वितरण पर राष्ट्रीय योजना तैयार होने के अंतिम चरण में है। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉक्टर वी के पॉल ने कहा कि टीके की भारतीय आबादी के लिए जरूरी खुराक उपलब्ध नहीं होंगी, लेकिन सरकार संभावनाओं पर काम कर रही है और नियामक की मंजूरी मिलने की स्थिति में इसकी खरीद और वितरण के लिए एक रणनीति तैयार करेगी। पॉल कोविड-19 पर राष्ट्रीय कार्यबल के प्रमुख भी हैं।

'वैक्सीन स्टोरेज के लिए रणनीति पर होगा काम'
डॉक्टर पॉल ने कहा कि हालांकि फाइजर कंपनी के टीके को भारत पहुंचने में कुछ महीने लग सकते हैं। उन्होंने कहा, 'फाइजर की तरफ से विकसित टीके को शून्य से 70 डिग्री सेल्सियस नीचे के तापमान पर रखने के लिए कोल्ड चेन की व्यवस्था किसी भी देश के लिए बड़ी चुनौती है। लेकिन फिर भी, यदि यह हासिल होता है तो हम समीक्षा कर रहे हैं कि हमें क्या करने की जरूरत है…और हम एक रणनीति पर काम करेंगे।'

Tags

Related Articles

Close