राजनीति

 रैलियों के मुद्दे भी गरमाने लगे, मुख्यमंत्री के भाषणों में छाए रहते हैं महिलाओं के मुद्दे

 नई दिल्ली 
बिहार विधानसभा चुनाव में वोटिंग की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे रैलियों के मुद्दे भी गरमाने लगे हैं। रैलियों में भीड़ से उत्साहित नेता प्रतिपक्ष और महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव जनता से वादों की झड़ी लगा रहे हैं। 10 लाख नौकरी देने से लेकर किसानों की कर्जमाफी तक की बात कही जा रही है। वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने 15 वर्षों के कार्यकाल की तुलना लालू यादव और राबड़ी देवी के कार्यकाल से कर रहे हैं। मुख्यमंत्री रैलियों में जब भी मंच से बोलते हैं तो वह सबसे ज्यादा समय महिला सशक्तिकरण के लिए किए गए अपने प्रयासों पर देते हैं। सीएम नीतीश इस दौरान 90 के दशक में बिहार की स्थिति का आईना भी विपक्ष को दिखाते हैं। साथ ही लोगों से कहते हैं कि वोट देने से पहले एकबार तुलना जरूर कर लें।

नीतीश कुमार के भाषणों में छाए रहते हैं महिलाओं से जुड़े मुद्दे
चुनावी रैली हो या फिर वर्चुअल नीतीश कुमार लगातार महिला शिक्षा, महिलाओं को पंचायत चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण, महिला सुरक्षा, बिहार पुलिस की नौकरी में आरक्षण की बात करते हैं। पहले पूरे बिहार में नौवीं क्लास में एक लाख 70 हजार से भी कम लड़कियां पढ़ती थीं। अब लड़के और लड़कियों की संख्या बराबर हो गई है। मैट्रिक में तो लड़कों से ज्यादा लड़कियों ने परीक्षा दी है। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने सबसे पहले लड़कियों को साइकिल और पोशाक देना शुरू किया, जिससे लड़कियों की उपस्थिति सुधरी। अपने भाषणों में नीतीश कुमार पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का जिक्र करना भी नहीं भूलते हैं।
 
बिहार पुलिस की नौकरी में महिलाओं को आरक्षण
एक रैली में नीतीश कुमार बोल रहे थे कि जब वह पटना की सड़कों पर घूमते थे तो कहीं भी महिला कॉन्सटेबल या अधिकारी नहीं दिखती थीं। इसके बाद हमारी सरकार ने नौकरी में उनके लिए अलग से आरक्षण की व्यव्साथ की। आज देखिए स्थिति बदली हुई है। ट्रैफिक से लेकर क्राइम कंट्रोल तक की जिम्मेदारी महिलाएं संभाल रही हैं। इसी दौरान उन्होंने उस दौर का भी जिक्र किया जब महिलाएं शाम के बाद घर से बाहर निकलना सुरक्षित नहीं महसूस करती थीं।

नीतीश कुमार ने रैली में कहा कि महिलाओं में जागृति आई है। समाज के हर तबके की महिलाओं को ऊपर लाने के लिए काम किया गया। नीतीश ने कहा कि मीडिल और हाईस्कूल ही नहीं प्राथमिक में भी बच्चे-बच्चियां स्कूल नहीं जा पाते थे। उन्हें स्कूल भेजने के लिए योजनाएं शुरू की गईं। अब स्कूल से बाहर रहने वालों की संख्या नहीं के बराबर हैं। नीतीश ने कहा कि इंटर करने वाली लड़कियां को दस हजार और स्नातक करने वाली लड़कियों को 25 हजार की मदद देते हैं। अगली बार मौका मिला तो जो लड़की इंटर पास करेगी उसे 25 हजार और स्नातक करने वाली लड़की को 50 हजार देंगे ताकि और लड़कियां पढ़ें।
 
ऐश्वर्या के बहाने लालू परिवार पर साधा निशाना
परसा विधानसभा क्षेत्र के डेरनी में चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे नीतीश कुमार ने लालू की बहु ऐश्वर्या के साथ हुए व्यवहार का मुद्दा उठाया। मंच पर ही मौजूद ऐश्वर्या की तरफ इशारा करते हुए नीतीश ने कहा कि इतनी पढ़ी लिखी महिला हैं। इनके साथ अच्छा नहीं हुआ। लालू या तेज प्रताप का बिना नाम लिये कहा कि इस तरह का व्यवहार करना अभी दिखाई नहीं पड़ेगा लेकिन भविष्य में दिखाई देगा। बाद में पता चलेगा कि लड़कियों के साथ महिलाओं के साथ पाप करना कितना खतरनाक होता है। नीतीश कुमार डेरनी में ऐश्वर्या के पिता और लालू के समधि चंद्रिका राय के पक्ष में सभा करने पहुंचे थे।

अपनी प्रत्येक रैलियों में नीतीश कुमार ने कानून व्यवस्था के रिकॉर्ड का भी जिक्र किया है।भोरे और ज़िरादेई में उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के 2018 के आंकड़ों के हवाले से कहा कि बिहार राज्यों की सूची में 23 वें स्थान पर है। इसके विपरीत, उन्होंने राजद के 15 वर्षों के शासन के बारे में कहा, “कोई भी शाम को बाहर नहीं जा सकता था। नरसंहार और अपहरण दिन में भी होते थे।”

यूं ही नहीं महिला वोटर को साध रहे हैं नीतीश कुमार
बिहार उन कुछ राज्यों में से एक है जहां 2005 के विधानसभा चुनावों के बाद से महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक संख्या में मतदान करने के लिए निकली हैं। महिला मतदाताओं का मतदान 54.85% से बढ़कर 2015 में 59.92% हो गया, जबकि पुरुषों की संख्या इस अवधि के दौरान 50.7% से बढ़कर 54.07% हो गई। 2019 के लोकसभा चुनाव में, बिहार में महिला मतदाताओं की संख्या 60% के करीब थी। इस बार, चुनाव आयोग महिला मतदाताओं पर मतदान प्रतिशत 60% से आगे ले जाने के लिए कोशिश कर रहा है।

आकंड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि आखिर नीतीश कुमार महिलाओं को साधने की कोशिश में किन कारणों से लगे हुए हैं। नीतीश कुमार कुमार को पता है कि अगर उन्हें आधी आबादी का समर्थन मिल गया तो बिहार की कुर्सी की उनकी राह आसान हो जाएगी। आपको बता दें कि नीतीश कुमार ने महिलाओं की ही मांग पर पूरे राज्य में पूर्ण शराबबंदी कानून को लगू किया था। महिलाओं ने इस फैसले को लेकर खुशी का इजहार भी किया था। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या नीतीश कुमार पर महिलाओं का भरोसा इस चुनाव में भी कायम रहता है या नहीं?

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