राजनीति

नई जिम्मेदारी के साथ नए अवतार में दिग्विजय

कांग्रेस की 4 सीट जिताने, रूठे को मनाने और विरोधियों को घेरने का दायित्व          

भोपाल
मध्य प्रदेश में होने जा रहे 28 सीटों के उपचुनाव में अभी तक प्रत्यक्ष भूमिका से दूर रहे पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद दिग्विजय सिंह को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है. वह अब सत्ता की चाबी के लिए हो रहे इस महत्वपूर्ण राजनीतिक समर में कांग्रेस की ओर से महती भूमिका में दिखाई देने वाले हैं।

इस चुनाव में उनकी प्रत्यक्ष सक्रियता के अभाव को लेकर प्रतिद्वंदी दल भाजपा नेताओं द्वारा कई तरह के सवाल उठाए जा रहे थे, साथ ही यह बताने की कोशिश की जा रही थी कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके बीच लगातार दूरियां बढ़ रही है और इसीलिए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी से दूर रखा जा रहा है। इतना ही नहीं दिग्विजय समर्थक कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी इस बात को लेकर निराशा के भाव के साथ दबे स्वर में सुगबुगाहट का दौर शुरू हो गया था।

कांग्रेस के भरोसेमंद सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दिग्विजय सिंह को विरोधी पार्टी के नेताओं को चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में घेरने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। इसके पीछे कांग्रेस की मंशा यह बताई जा रही है कि भाजपा एवं अन्य दलों के नेताओं को चुनाव आयोग के सवाल-जवाब में उलझा कर उप चुनाव के प्रचार से उनका ध्यान बांटना है। इतना ही नहीं पार्टी ने उन्हें पूरे 28 विधानसभा क्षेत्रों के ऐसे कांग्रेस नेताओं को मनाने और चुनाव प्रचार की मुख्यधारा में जोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी भी दी  है ,जो किसी ना किसी कारण से पार्टी और क्षेत्र के प्रत्याशी से नाराज चल रहे हैं और अभी तक चुनाव प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने उन्हें राजगढ़ जिले के ब्यावरा, गुना जिले के बमोरी और अशोकनगर जिले के अशोकनगर व मुंगावली विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को जिताने का बड़ा दायित्व भी सौंपा है। इसी के अनुसार उन्होंने अपना काम भी शुरू किए कर दिया है। इन चारों विधानसभा क्षेत्रों में उनके भाई लक्ष्मण सिंह और पुत्र जयवर्धन सिंह लगातार सक्रियता दिखा रहे हैं। समझा जा रहा है कि दिग्विजय सिंह को उपचुनाव की मुख्य भूमिका में लाने से एक तरफ भाजपा के सवालों का मुंह तोड़ जवाब मिला है ,वही दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक बड़े वर्ग को महत्त्व देने का प्रयास भी किया गया है।

 इधर , दो मंत्रियों का इस्तीफा
 उप चुनाव की सरगर्मी के बीच शिवराज मंत्रिमंडल के 2 सदस्यों को इस्तीफा देना पड़ा है। यह दोनों कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत सिंधिया गुट के हैं । इन्होंने शिवराज मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में पांच अन्य के साथ शपथ ली थी। दोनों बिना विधायक बने ही मंत्री बने थे और 6 माह के कार्यकाल समाप्त होने के बाद वैधानिक बाध्यता के तहत उन्हें मुख्यमंत्री को इस्तीफा सौपना  पड़ा। बुधवार को मुख्यमंत्री ने दोनों का इस्तीफा मंजूर करने के तुरंत बाद राजभवन को सूचित कर दिया है। बता दें कि राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत अपने परंपरागत विधानसभा क्षेत्र सागर जिले के सुरखी से और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट इंदौर जिले के सांवेर सीट से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर उपचुनाव लड़ रहे हैं। जहां उनका सीधा मुकाबला क्रमशः कांग्रेस प्रत्याशी पारुल साहू और प्रेमचंद गुड्डू  से है। दोनों में समानता यह भी है कि इन दोनों सीट पर चारों प्रत्याशी दल बदल कर चुनाव लड़ रहे हैं।

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