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कोरोना का कहर: निगेटिव होने के बाद भी जिंदगियां निगल रहा कोविड-19 वायरस

 गोरखपुर 
कोरोना की गुत्थी अभी पूरी तरह नहीं सुलझी है। इस वायरस से संक्रमित लोग निगेटिव होने के बाद भी खतरे की जद में हैं। जिले में इस वायरस के संक्रमण से निगेटिव हो चुके छह लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। इसके अलावा निगेटिव हुए 30 से अधिक लोग दोबारा बीमार हो चुके हैं। जिले के पहले संक्रमित की निगेटिव होने के बाद मौत हो गई। वह अप्रैल के अंतिम हफ्ते में संक्रमित हुआ था। एक महीने तक संक्रमण से जूझता रहा। निगेटिव होने के एक महीने बाद हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई। इसी तरह झारखंडी निवासी 58 वर्षीय व्यक्ति जुलाई में संक्रमित हुए। अगस्त के दूसरे पखवारे में वह निगेटिव हो गए। रविवार को उनकी तबीयत फिर बिगड़ी। सांस लेने में तकलीफ हुई। परिजन लेकर निजी अस्पताल पहुंचे, जहां उनकी मौत हो गई।

निगेटिव होने के बाद भी कोरोना के लक्षण 
कोरोना संक्रमण खत्म होने के बाद भी कुछ लोगों में लक्षण दिख रहे हैं। यह डॉक्टरों को भी हैरान करने वाला है। निगेटिव हो चुके 30 लोगों में दोबारा कोरोना के लक्षण दिखे। इनमें कुछ लोगों को सांस लेने में तकलीफ हुई जबकि कुछ लोग पेट दर्द के शिकार हुए। कुछ संक्रमितों में फेफड़े की बीमारी भी हुई।

निगेटिव हो चुके लोग भी ले रहे ऑक्सीजन 
महानगर के एक निजी अस्पताल के संचालक के भाई संक्रमित हुए। वह करीब 25 दिन बीआरडी मेडिकल कॉलेज भर्ती रहे। जिसमें 15 दिन वह आईसीयू में रहे। करीब 20 दिन पहले उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। इसके बावजूद उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है। वह घर पर सिलेंडर से ऑक्सीजन ले रहे हैं। डॉक्टरों ने उन्हें दो महीने सिलेंडर से ऑक्सीजन लेते रहने की सलाह दी है।

रेजीडुअल डैमेज कर रहा है कोरोना
फिजीशियन डॉ. आशुतोष शुक्ला ने बताया कि कोरोना संक्रमण से निगेटिव होने का अर्थ खतरे से बाहर होना नहीं है। यह वायरस शरीर के आंतरिक अंगों खास कर दिल, फेफड़ा, लिवर व किडनी से जुड़ी धमनियों को नुकसान पहुंचा रहा है। फेफड़े में इसका असर लंबे समय तक रह रहा है। इसे रेजीडुअल डैमेज कहते हैं। यह जानलेवा होता है। 

निगेटिव होने के बाद रहें सतर्क
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि बुजुर्गों के अलावा बीपी व शुगर से पीड़ित व्यक्ति के कोरोना संक्रमित होने पर रेजीडुअल डैमेज का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोगों की संक्रमण के दौरान हालत नाजुक हो जा रही है। इस संक्रमण के कारण खून में थक्के जम रहे हैं। जिससे दिल व फेफड़े की बीमारी हो रही है। 

छह महीने रहें सतर्क, कराते रहें जांच
डॉ. आशुतोष बताते हैं कि संक्रमितों के लिए छह महीने महत्वपूर्ण हैं। निगेटिव होने के बाद भी वे निश्चिंत न हों। हर महीने दिल व फेफड़े की जांच कराएं। डी-डाईमर और क्लॉटिंग प्रोफाइल की जांच जरूरी है। एंटीक्लॉटिंग दवाएं लें। बीपी व शुगर नियंत्रित रखें। रोजाना कसरत करें। फिजियोथेरेपी कराएं। फिजीशियन के संपर्क में रहे। डॉक्टर को महीने में एक बार अपनी रिपोर्ट जरूर दिखाएं। इसके बावजूद अगर कभी तबीयत खराब हो तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।

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