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राम मंदिर निर्माण : 70 एकड़ परिसर से सटी भूमि की पैमाइश पूरी, पुलिस विभाग को होगी आवंटित

 अयोध्या  
रामजन्मभूमि के 70 एकड़ से सटी नजूल की खाली भूमि की पैमाइश करा ली गयी है। करीब 14 हजार वर्ग फिट यह जमीन प्रदेश सरकार की ओर से पुलिस विभाग को आवंटित की जाएगी। यह जमीन पहले से ही पर्यटन विभाग को आवंटित है। इसके कारण सात जनवरी 1993 में अधिग्रहण के दौरान 70 एकड़ परिसर से इसे बाहर रखा गया था। यह भूमि राम जन्मस्थान-सीतारसोई के पीछे और 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्र के ठीक बगल में स्थित है। 

यह भूमि खाली पड़ी होने के कारण पुलिस विभाग को आवंटित करने का प्रस्ताव जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को भेजा गया है। इस सम्बन्ध में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व व नजूल प्रभारी जीएल शुक्ल से पूछने पर उन्होंने सीधे अनभिज्ञता जता दी। बावजूद इसके सहायक भूलेख अधिकारी भान सिंह के नेतृत्व में बंदोबस्त व नजूल विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर जाकर पैमाइश पूरी कराई।

मालूम हो कि रामजन्मभूमि परिसर में स्थित मानस भवन में एसपी सुरक्षा व कंट्रोल रुम सहित सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी अन्य एजेंसियों के कार्यालय तीन दशक से संचालित हो रहे थे। राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरु होने के बाद मानस भवन को खाली कराकर उसे ध्वस्त किया जाना है।

इसी के चलते पुलिस विभाग की ओर से भूमि आवंटन की मांग की थी। पिछले दिनों रामजन्मभूमि की स्थाई सुरक्षा समिति की बैठक में एडीजी सुरक्षा वीके सिंह व एडीजी कानून व्यवस्था पीबी साबत के समक्ष यह मसला एसपी सुरक्षा पंकजकुमार की ओर से प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद डीआईजी/एसएसपी दीपककुमार को ओर से शासन को पत्र प्रेषित किया गया।

इसी पत्र के परिप्रेक्ष्य में शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी अनुजकुमार झा की ओर से प्रस्ताव दिया गया है। इससे पूर्व पुलिस विभाग के अधिकांश कार्यालयों को परिसर में स्थित पुलिस चौकी परिसर में अस्थाई रुप से शिफ्ट कर आवश्यक कार्य निपटाया जा रहा है।

दुराही कुंआ से गोकुल भवन के बीच सीधा होगा परिसर

रामजन्मभूमि के 70 एकड़ परिसर में अधिग्रहण के दौरान टेढ़ी बाजार से दुराही कुंआ मार्ग पर रिहायशी इलाके को छोड़कर जिग-जैग भूमि का अधिग्रहण किया गया था। इस क्षेत्र में माली मंदिर के अलावा एक दर्जन के आसपास मकान है। सुरक्षा की दृष्टि से इन भवनों को खाली कराकर परिसर के छूटे हिस्से को शामिल कर परिसर को वर्गाकार किया जाएगा। इसके लिए भवन स्वामियों से आपसी बातचीत के माध्यम से अतिरिक्त भूमि क्रय किए जाने की योजना पर मंथन किया जा रहा है।  

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