देश

होटल लक्ष्मी विलास: अरुण शौरी के साथ ही ज्योत्सना सुरी को भी नोटिस 

 
जयपुर 

 राजस्थान की सीबीआई कोर्ट ने उदयपुर के होटल लक्ष्मी विलास के इन्वेस्टमेंट में एनडीए की पहली सरकार को दोषी करार देते हुए अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में विनिवेश मंत्री रहे अरुण शौरी को गिरफ्तारी वारंट से तलब किया है.

उदयपुर के सबसे शानदार होटल लक्ष्मी विलास पैलेस को 2004 में वाजपेयी सरकार के विनिवेश मंत्रालय ने केवल 7.5 करोड़ कि डिसइनवेस्टमेंट करते हुए ललित ग्रुप को बेच दिया था. इसे लेकर उदयपुर में काफी हंगामा मचा था, क्योंकि इतने बड़े होटल की इतनी कम कीमत लगाने पर हर कोई आश्चर्य में था.

पूरे मामले की जांच यूपीए सरकार ने नहीं कराई और उसके बाद आश्चर्यजनक रूप से एक सूचना के आधार पर 13 अगस्त 2014 को एफआईआर दर्ज की गई थी. सीबीआई ने जांच के बाद इसमें कुछ मिलता हुआ नहीं बताकर क्लोजर रिपोर्ट लगा दिया, मगर कोर्ट ने इसे मानने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि सीबीआई ने अपनी जांच में पाया है कि जमीन की कीमत 151 करोड़ बनती है तो फिर जांच में क्लोजर रिपोर्ट कैसे लग सकती है.

सीबीआई जोधपुर कोर्ट ने सीबीआई को इस मामले को फिर से जांचने के आदेश दिए, मगर सीबीआई ने एक बार फिर से क्लोजर रिपोर्ट लगा दिया. इस बात पर नाराज सीबीआई कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाते हुए उसकी भूमिका पर सवाल उठा दिया और कहा कि जिन तथ्यों को आपने लिखा है उस पर जांच का रिपोर्ट दीजिए. 

आखिरी बार 13 अगस्त 2019 को सीबीआई कोर्ट ने सीबीआई से फिर से जांच के आदेश दिए थे. इस पर सीबीआई ने तीसरी बार जांच किया और इस बार मंत्री और अफसरों के पद का दुरुपयोग का मामला बताते हुए कहा कि जमीन की डीएलसी 500 से लेकर 1000 रुपये के मध्य थी. इसके बावजूद इसे कम दाम पर बेचा गया और करीब 244 करोड़ रुपए का नुकसान सरकार को हुआ है.

सीबीआई की आखिरी रिपोर्ट पर कोर्ट ने तत्कालीन विनिवेश मंत्री अरुण शौरी, तत्कालीन विनिवेश सचिव प्रदीप बैंजल, मैसर्स लजार्ड इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष गुहा, भारत होटल की निदेशक ज्योत्सना सुरी के खिलाफ धारा 120 बी 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम धारा 13 डी के तहत अपराध पाया है और सभी आरोपियों को गिरफ्तारी वारंट से तलब किया है.

Related Articles

Close