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प्रमुख भारतीयों की जासूसी कर रही है चीनी कंपनी? सरकार ने जांच के लिए बनाई एक्सपर्ट कमिटी, चीन के सामने भी उठाया मुद्दा

नई दिल्ली
सरकार ने नैशनल साइबर सिक्यॉरिटी को-ऑर्डिनेशन के तहत एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन कर दिया है जो चीन की कंपनी शेनजेन जेन्हुआ (Shenzen Zhenhua) पर भारत की प्रमुख हस्तियों के डेटा चुराने के लग रहे आरोपों की जांच करेगी। यह एक्सपर्ट ग्रुप जासूसी की इन खबरों के प्रभावों का आकलन करेगा और इस बात का भी पता लगाएगा कि क्या इस प्रक्रिया में कानून के किसी प्रकार का उल्लंघन हुआ है। एक्सपर्ट ग्रुप को 30 दिनों के अंदर अपनी स्टडी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

विदेशी मंत्री ने पत्र लिख दी जानकारी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीनी कंपनी की तरफ से जासूसी का मुद्दा उठाने वाले कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य केसी वेणुगोपाल को चिट्ठी लिखकर इसकी जानकारी दी। उन्होंने पत्र में लिखा, 'सरकार ने इस खबर को बहुत गंभीरता से लिया है जिसमें कहा गया है कि विदेशी स्रोतों से भारतीय नागरिकों का पर्सनल डेटा बिना उनकी अनुमति के हासिल किया जा रहा है।'

भारत ने चीनी राजदूत से मांगी सफाई
पत्र में कहा गया है कि इस मामले को चीन के विदेश मंत्रालय के सामने भी उठाया गया है। मंत्री ने वेणुगोपाल को बताया, 'इस मामले को विदेश मंत्रालय ने आज चीन के राजदूत के समक्ष उठाया। बीजिंग में हमारे दूतावास ने इसे चीन के विदेश मंत्रालय के समक्ष भी उठाया। चीनी पक्ष ने कहा कि शेनजेन जेन्हुआ एक निजी कंपनी है।' उन्होंने कहा, 'चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि संबंधित कंपनी और चीन सरकार के बीच कोई संबंध नहीं है।' जयशंकर का यह बयान वेणुगोपाल की तरफ से इस मामले को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान उठाने के बाद आया है। जयशंकर ने पत्र में बताया कि शेनजेन जेन्हुआ के एक प्रतिनिधि ने कहा कि डेटा, ओपन सोर्सेज से लिए गए हैं। मंत्री ने कहा कि कंपनी ने गोपनीय सूत्रों से निजी जानकारियां हासिल किए जाने की बात से इनकार किया है। यह बहुत चौंकाने वाला है… निगरानी में भारत के राष्ट्रपति, आप भारत के उपराष्ट्रपति भी, प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सहित विपक्षी नेताओं, मुख्यमंत्री, सांसद, सेना प्रमुख और उद्योगपति शामिल हैं।
केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस सांसद

संसद के दोनों सदनों में उठा मुद्दा
दरअसल, कांग्रेस के सदस्यों ने बुधवार को संसद के दोनों सदनों में उस मीडिया रिपोर्ट पर चिंता व्यक्त की जिसमें कहा गया है कि एक चीनी टेक्नॉलजी कंपनी की तरफ से 10 हजार से अधिक प्रमुख भारतीय लोगों और संगठनों पर नजर रखने की बात की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन की डिजिटल आक्रमकता से निपटने के लिए सरकार को मजबूत व्यवस्था बनानी चाहिए। कांग्रेस के दो सदस्यों के सी वेणुगोपाल और राजीव सातव ने राज्यसभा में शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाया। इस पर राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने संसदीय कार्य मंत्री से कहा कि वह इस पर ध्यान दें और संबंधित मंत्री को इसकी जानकारी दें। उधर, लोकसभा में शून्यकाल में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि चीन ने पहले कोरोना वायरस से आक्रमकता दिखाई, फिर सीमा पर आक्रमकता दिखाई और अब वह डिजिटल आक्रमकता दिखा रहा है। उन्होंने कहा, 'हम चीन के चंगुल में फंस गए हैं। क्या सरकार इससे अवगत है?' चौधरी ने इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद से कहा कि चीन की डिजिटल अग्रेसिवनेस से निपटने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए। कांग्रेस के कोडिकुनिल सुरेश ने भी निचले सदन में यह मुद्दा उठाया।

वेणुगोपाल ने कहा- बहुत चौंकाने वाली खबर है
राज्यसभा में यह मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस के संगठन महासचिव वेणुगोपाल ने कहा कि वह एक चौंकाने वाली खबर की ओर ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की प्राइवेसी से संबंधित है। उन्होंने कहा कि एक अंग्रेजी समाचार पत्र की एक खबर में कहा गया है कि चीन की सरकार और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी टेक कंपनी अपने विदेशी लक्ष्यों के ग्लोबल डेटा बेस में 10 हजार से अधिक भारतीय लोगों और संगठनों पर नजर रख रही है। वेणुगोपाल ने कहा, 'यह बहुत चौंकाने वाला है… निगरानी में भारत के राष्ट्रपति, आप भारत के उपराष्ट्रपति भी, प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सहित विपक्षी नेताओं, मुख्यमंत्री, सांसद, सेना प्रमुख और उद्योगपति शामिल हैं।'
इस मामले को विदेश मंत्रालय ने आज चीन के राजदूत के समक्ष उठाया। बीजिंग में हमारे दूतावास ने इसे चीन के विदेश मंत्रालय के समक्ष भी उठाया। चीनी पक्ष ने कहा कि शेनजेन शेन्हुआ एक निजी कंपनी है।
एस. जयशंकर, विदेश मंत्री

उन्होंने कहा कि चीनी कंपनी ने प्रमुख पदों पर आसीन नौकरशाहों, न्यायाधीशों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, पत्रकारों, अभिनेताओं, खिलाड़ियों, धार्मिक हस्तियों और कार्यकर्ताओं के आंकड़े भी एकत्र किए हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि यह गंभीर चिंता का क्षेत्र है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार ने इस पर ध्यान दिया है और क्या कार्रवाई की गई है ?

सातव ने कहा- बेहद गंभीर मुद्दा
राजीव सातव ने कहा कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक चीनी कंपनी प्रमुख लोगों की जासूसी कैसे कर सकती है। सभापति नायडू ने संसदीय कार्य मंत्री से इस मामले पर गौर करने को कहा। उन्होंने कहा कि यह प्रमुखता से सामने आया है, इसलिए संबंधित मंत्री को सूचित करें और देखें कि क्या किया जा सकता है। उन्होंने इसकी सत्यता का भी पता लगाने को कहा।
 

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