देश

इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था में आएगी 9% की गिरावट: ADB का अनुमान

 
नई दिल्ली  

अब एशियाई विकास बैंक (ADB) ने यह अनुमान लगाया है कि इस वित्त वर्ष यानी 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 9 फीसदी की गिरावट आ सकती है. इसके पहले कई रेटिंग एजेंसियां भी भारतीय अर्थव्यवस्था में 9 से 15 फीसदी तक की गिरावट का अनुमान जारी कर चुकी हैं. कोरोना संकट की वजह से देश की जून तिमाही की ​जीडीपी में 23.9 फीसदी की भारी गिरावट आई है. ज्यादातर रेटिंग एजेंसियों ने इस पूरे वित्त वर्ष में इकोनॉमी में भारी गिरावट का अनुमान लगाया है. 

क्या कहा एडीबी ने 
एडीबी की ओर से मंगलवार को जारी एशियाई विकास परिदृश्य (एडीओ)-2020 अपडेट में कहा गया, 'भारत में कोरोना वायरस की वजह से आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. इसका असर उपभोक्ता धारणा पर भी पड़ा है, जिससे चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 9 फीसदी की गिरावट आएगी.' 

9 से 15 फीसदी का आंकड़ा 
गौरतलब है कि इस तरह कई रेटिंग एजेंसियों ने इस पूरे वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में 9 से 15 फीसदी तक की गिरावट का आंकड़ा जारी कर​ दिया है. रेटिंग एजेंसी फिच ने यह अनुमान जारी किया था कि कोरोना संकट की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था में इस वित्त वर्ष में 10.5 फीसदी की गिरावट आ सकती है.

इनवेस्टमेंट बैंक गोल्डमन सैक्श (Goldman Sachs) ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 14.8 फीसदी की भारी गिरावट आ सकती है. इंडिया रेटिंग ऐंड रिसर्च (Ind-Ra) ने वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी में 11.8 फीसदी की गिरावट का अनुमान जारी किया है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा है कि वित्त वर्ष 2020-21 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 9 फीसदी की गिरावट आ सकती है. 

अगले वित्त वर्ष में भारी बढ़त 
एडीबी का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ा उछाल आएगा. एडीबी ने कहा कि आवाजाही तथा कारोबारी गतिविधियां खुलने से अगले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी में बढ़त दर 8 फीसदी के आसपास रहेगी. 

 एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री यासुयुकी सवादा ने कहा, ‘भारत ने महामारी के प्रसार को रोकने के लिए सख्त लॉकडाउन लगाया. इससे आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं.' उन्होंने कहा, ‘अगले वित्त वर्ष और उससे आगे अर्थव्यवस्था की वृद्धि के लिए महामारी पर अंकुश के उपाय, जांच, निगरानी और इलाज की क्षमता का विस्तार महत्वपूर्ण है. इन उपायों को प्रभावी तरीके से कार्यान्वित करने की जरूरत है, तभी अर्थव्यवस्था आगे उबर पाएगी.

Tags

Related Articles

Close