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सोना-चांदी के प्राइज में तेजी के बाद भी पुराना गोल्ड बेचने वालों की संख्या घटी

कानपुर
कोरोना को लेकर परेशान लोगों ने वर्तमान की जगह भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास तेज कर दिया है। यही कारण है सोने-चांदी के दामों में तेजी के बाद भी लोग न तो सोना-चांदी खरीद रहे हैं और न ही गिरवी रखकर बदले में ऋण ले रहे हैं। अप्रैल व मई में सोना-चांदी बेचने वालों की संख्या तुलनात्मक रूप से जुलाई से अगस्त के बीच मात्र 30 से 35 फीसदी ही रह गई है। गोल्ड लोन कंपनियों और पांच बड़े बैंकों से अप्रैल व मई में करीब 2600 लोगों ने गोल्ड लोन लिया था। जून से अगस्त के बीच संख्या घटकर 1150 रह गई। सऱाफा बाजारों से मिले अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक मई-जून में करीब 3200 लोगों ने सोना गिरवी रखा लेकिन जुलाई- अगस्त में ये संख्या घटकर 1000 रह गई।

महेश चंद्र जैन, अध्यक्ष, यूपी सराफा एसोसिएशन बताते है कि अपने यहां सोना निवेश का माध्यम भर नहीं है बल्कि हमारा सोने से भावनात्मक लगाव है। इसीलिए अप्रैल-मई में सोना बेचने वालों की जो संख्या बढ़ी थी, वो जुलाई आते-आते चौथाई रह गई। जितना माना जा रहा था, उसका महज 25 फीसदी ग्राहक घरों का सोना बेचने बाहर निकला।  

नीरज दीक्षित, प्रवक्ता, श्री कानपुर सराफा कमेटी, चौक सराफा ने बताया कि जब सोना बढ़ता है तो ज्यादा रेट के लालच में लोग इंतजार करते रहते हैं। जब घटता है तो और गिरने की उम्मीद में बाजार नहीं आते। इन दिनों यही हो रहा है। बाजार में बेचने वाले और खरीदने वाले, दोनों ही गायब हो गए हैं। ग्राहक जल्दी सोना बेचता भी नहीं है। रजनीश गुप्ता, मंत्री, यूपी बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन का कहना है कि बैंकों में गोल्ड लोन लेने वालों की संख्या मई तक तेजी से बढ़ी लेकिन फिर एकाएक घटने लगी। चूंकि सोना गिरवी रखना हमारी संस्कृति में आखिरी विकल्प माना जाता है इसलिए आय का छोटा सा रास्ता मिलते ही गोल्ड लोन में कमी आ गई।

तस्करी के कारण बाजार में सोने के दो रेट
सोने के भाव में लगी आग पर भले ही थोड़ा-सा काबू पा लिया गया हो लेकिन बाजार में ग्राहक न के बराबर हैं। कानपुर का दस हजार करोड़ सालाना का सराफा कारोबार सिमट कर 10 फीसदी भी नहीं बचा। बाजार में सोने के दो भाव ने परेशानियों को और बढ़ा दिया है। कैश और चेक से खरीदे गए सोने में 2000 रुपए प्रति दस ग्राम तक का अंतर है। इसका सबसे बड़ा कारण तस्करी से आने वाला सोना है। म्यानमार और बांग्लादेश से तस्करी का सोना बड़े पैमाने पर आ रहा है।

 कैश की किल्लत से व्यापारी भी नहीं खरीद रहे सोना
राजेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ सदस्य, यूपी सराफा एसोसिएशन बताते है कि बाजार में लिक्विडिटी नहीं है। जब पेमेंट नहीं आ रहा है तो व्यापारी खरीदना नहीं चाहता। चेक से लेने और कैश खरीदने पर सोने के भाव अलग-अलग हैं। दोनों में करीब दो से ढाई हजार रुपए दस ग्राम का अंतर है।

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