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पुलवामा आतंकी हमला:  NIA ने सुलझाई केस की गुत्थी 

 नई दिल्ली 
पुलवामा आतंकी हमले की गुत्थी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सुलझा ली है। मंगलवार को इस केस में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। जांच के क्रम में ही मसूद अजहर के भतीजे मोहम्मद उमर फारूक, पाकिस्तानी आतंकवादी कामरान अली और कारी यासिर जैसे आतंकवादियों के सुरक्षा बलों ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया। 29 मार्च, 2019 को हमले में शामिल एक महत्वपूर्ण आतंकी फारूक की मौत हो गई, लेकिन उसका मोबाइल फोन कई महीनों तक जम्मू-कश्मीर पुलिस के पास पड़ा रहा।

यह मोबाइल फोन के रूप में दिसंबर 2019 में एनआईए के लिए आशा की पहली किरण आई। फारुक के मोबाइल फोन से कई फोटो, वीडियो और बातचीत के रिकॉर्ड जांच एजेंसी को हाथ लगे। एक अधिकारी के अनुसार मोबाइल में आतंकी के पाकिस्तान से भारत तक यात्रा की कई तस्वीरों के साथ-साथ उसके गुर्गों और बम बनाने की प्रक्रिया की भी तस्वीर थी।

इसके अलावा जांच के दौरान जैश-ए-मोहम्मद नेतृत्व के साथ उसकी व्हाट्सएप पर हुई बातचीत, मुख्य रूप से उसके चाचा अब्दुल रूफ असगर, पाकिस्तान में अम्मार अल्वी और घाटी से अन्य ऑपरेटिव से चैट का ब्यौरा मिला। जल्द ही, इंस्पेक्टर जनरल अनिल शुक्ला, डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल सोनिया नारंग और पुलिस अधीक्षक राकेश बलवाल के नेतृत्व में जांच दल को फारूक के फोन में एक कश्मीरी युवक शाकिर बशीर मगरे की तस्वीर मिली, जिसकी पहचान पुलवामा के काकापोरा के निवासी के रूप में की गई थी।

शाकिर बशीर मगरे, विस्फोट स्थल के पास चीरघर चलाता था, जहां से उसने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफिले की टोह ली थी। इस मामले में उसे 28 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। यह पाया गया कि उसके घर का इस्तेमाल विस्फोटकों को स्टॉक करने और बम बनाने के लिए किया गया था। उसी बम का इस्तेमाल सीआरपीएफ के काफिले पर हमला करने और 40 सुरक्षाकर्मियों को मारने के लिए किया गया।
 
चैट रिकॉर्ड में एनआईए को यह पता चला हमले के बाद जब भारतीय और पाकिस्तानी फाइटर जेट डॉगफाइट में लगे हुए थे तब फारुक  यह चर्चा कर रहा था कि "दोनों देशों के बीच युद्ध होना चाहिए" क्योंकि यह सैकड़ों लोगों को मौका देगा जैश के लड़ाके भारत में घुसपैठ करने के लिए।

एनआईए ने उन वार्तालापों को भी खोज निकाला, जो यह साबित कर रहा था कि पाकिस्तान में बैठ फारूक के चाचा ने उसे पुलवामा के बाद दूसरे हमले की तैयारी के लिए निर्देश दे रहा था। लेकिन जैश को पाकिस्तान पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के मद्देनजर अपनी योजनाओं को रद्द करना पड़ा।

एजेंसी को पाकिस्तान के एलाइड बैंक लिमिटेड और मीज़ान बैंक में फारूक के दो बैंक खाते मिले, जिसमें पुलवामा हमले के लिए पैसा जमा किया गया था। फारूक के फोन से बरामद सेल्फी, फोटो, वीडियो और चैट ने एनआईए को पाकिस्तान की आतंकी साजिश की कड़ी स्थापित करने में मदद की।

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