भोपाल

दिव्यांगजनों की सुविधाओं को लेकर कलेक्टर लापरवाह, 3 लाख 89 हजार यूडीआईडी कार्ड बने

भोपाल
प्रदेश में दिव्यांगजनों की सुविधाओं को लेकर कलेक्टर काफी लापरवाह है। प्रदेश में दिव्यांगजनों की आबादी 15 लाख 51 हजार है और अभी तक केवल 3 लाख 89 हजार दिव्यांगजनों के यूडीआईडी कार्ड बन पाए है।कार्ड नहीं बन पाने के चलते दिव्यांगजनों को शासन की सभी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

सामाजिक न्याय विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर दिव्यांगजनों के यूडीआईडी कार्ड बनाए जाने में सुस्ती पर नाराजगी जताई है और काम में तेजी लाने को कहा है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के सभी दिव्यांगजनों को यूनिक डिसएबिलिटी कार्ड जनरेट और प्रदान किए जाने हेतु निर्देशित किया गया है। यूडीआईडी कार्ड जनरेट करने और नए दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने की कार्यवाही जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और सिविल सर्जन द्वारा की जाती है।

उन्होंने कलेक्टरों को लिखे पत्र में कहा है कि मध्यप्रदश की 2011 की जनगणना में 15 लाख 51 हजार  दिव्यांगजन है। विभाग द्वारा तैयार स्पर्श पोर्टल पर 6 लाख 23 हजार से अधिक दिव्यांगजनों का चिन्हांकन किया गया है। यूडीआईडी पोर्टल से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार केवल 3 लाख 89 हजार दिव्यांगजनों के यूडीआईडी कार्ड जनरेट किए गए है। अभी भी 2 लाख 3 हजार से अधिक ऐसे दिव्यांगजन जो स्पर्श पोर्टल पर चिन्हित किए जा चुके है लेकिन उनके यूडीआईडी कार्ड जनरेट नहीं हुए है। उन्होंने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को कहा है कि जनगणना के अनुसार सभी दिव्यांगजनों के यूडीआईडी कार्ड बनवाना सुनिश्चित कराए ताकि सभी को राज्य शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा है कि विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन हेतु जनपद पंचायत एवं नगरीय निकायों में समग्र सामाजिक सुरक्षा विस्तार अधिकारियों की पदस्थापना की गई है। अत: सभी कलेक्टर अपने जिले की जनपद पंचायत , नगरीय निकाय में पदस्थ समग्र सामाजिक सुरक्षा अधिकारियों को उनके क्षेत्र में निवासरत समस्त दिव्यांगजनों के यूडीआईडी कार्ड जनरेट करने हेतु लक्ष्य तय कर जिला कार्यालय के माध्यम से समन्वय करने और स्पर्श पोर्टल पर सत्यापित कराने हेतु निर्देशित करे।

आयुक्त सामाजिक न्याय ने कहा है कि अभी भी जिलों में पूर्व प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन प्राप्त कर आॅफलाईन ही नवीन दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे है। इन प्रमाणपत्रों में दिव्यांगता का प्रतिशत, प्रमाणपत्र की वैधता का स्पष्ट उल्लेख नहीं होता है। इसलिए दिव्यांगता के प्रमाणपत्र और यूडीआईडी कार्ड जनरेट करने के लिए आवेदन पत्र हिंदी में तैयार किया गया है। अब दिव्यांगजनों को नवीन प्रमाणपत्र बनवाने के लिए हिंदी में आवेदन लिया जाए और यूडीआईडी पोर्टल के जरिए नवीन दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किए जाए और पुराने प्रमाणपत्रों का नवीनीकरण किया जाए।

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