भोपाल

विनियामक आयोग और फीस कमेटी आमने-सामने

भोपाल
निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति अपने-अपने अधिकारों को लेकर आए दिन आमने-सामने बने रहते हैं। पूर्व के दो उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया और जीतू पटवारी बिना विवाद को सुलझा मंत्री पद छोड़ चुके हैं। अब गेंद नवनियुक्त उच्च शिक्षामंत्री मोहन यादव के पाले में जा गिरी है। वे भी आयोग और समिति के विवादों को सुलझाने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इससे आगामी सत्र में जहां प्रवेश को लेकर किल्लत होगी।

वहीं, फीस निर्धारण को लेकर कई विवाद खड़े हो जाएंगे। निजी विवि आयोग और फीस कमेटी जहां अपने अधिकारों को लेकर फाइट करते रहते हैं। वहीं, कॉलेज और विवि संचालक भी अपने अधिकारों की दुहाई देकर फीस बढ़ोतरी कराने में लगे रहते हैं।

आयोग और समिति नवनियुक्त मंत्री यादव से अधिकारों की लड़ाई पर विराम लगाने के कयास लगा रहे हैं, ताकि आयोग और समिति के अधिकार सीमित दायरे में निर्धारित हो सकें, लेकिन इस मामले में मंत्री यादव आयोग और समिति के बढ़ते विवाद को खत्म करने में कोई खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

प्रदेश में संचालित मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रोफेशनल कोर्स संचालित करने वाले कॉलेज अब निजी विश्वविद्यालय में तब्दील होने लगे हैं। इससे प्रदेश में करीब तीस निजी विवि के अस्तित्व में आकर संचालित होने लगे हैं। इससे स्वशासी निकाय होने के कारण वे अपनी फीस में मनमर्जी कर सकते हैं।

प्रदेश के सभी प्रोफेशनल संस्थानों की फीस का निर्धारण कमेटी के पास हैं। नियम में निजी विवि को स्पष्ट नहीं किया गया है। इससे विवाद गहराता जा रहा है। वहीं आयोग के नियम में विवि की फीस वे स्वयं स्वशासी निकाय होेने पर तय कर पाएंगे। इसमें कमेटी का कोई जिक्र नहीं हैं। जबकि उनकी फीस की समीक्षा करने का अधिकार आयोग को जरूर दिया है।  इससे निजी विवि की फीस में पचास फीसदी तक कटौती होती रही है।

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