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मीसा बंदी पेंशन योजना बन्द करना छत्तीसगढ़ हित और जनहित में लिया गया फैसला

रायपुर
मीसा बंदी पेंशन योजना बन्द किये जाने पर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा है कि मीसा बंदी पेंशन योजना बन्द करना छत्तीसगढ़ हित और जनहित में लिया गया फैसला है। पूर्व की रमन सरकार ने 2008 में भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों को पालने पोषने  सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया। बीते 12 साल में सरकारी खाजने पर 100 करोड़ से अधिक की राशि का बंदरबाट किया।100 करोड़ की राशि जो छत्तीसगढ़ के किसानों नोजवानो मजदूरों महिलाओं के स्वास्थ शिक्षा रोजगार सुरक्षा पर खर्च किया जाता। रमन सिंह के 15 साल के शासनकाल में प्रतिदिन फसल खराब होने उपज की सही कीमत नही मिलने से हताश परेशान कर्ज से दबे  प्रतिदिन दो किसान आत्महत्या करते थे। किसान के बच्चे भूख  प्यास से तड़पते रहे  किसान के बुजुर्ग माता-पिता को  दवाई नहीं मिल पाती थी ,किसान के बेटे बेटियों को सही शिक्षा नहीं मिल पाई अस्पतालों में दवाइयां स्वास्थ सुविधाओं की कमी रही स्कूलों की बिल्डिंग जर्जर होती गई और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोगों को सरकारी खजाने से दूधभात खिलाते रहे।

ठाकुर ने  कहा कि बीते 6 साल से देश में अघोषित आपातकाल लगा है। लोगों के मौलिक अधिकारो का हनन किया जा रहा है। ऐसे समय में  स्वयंभू लोकतंत्र के सेनानी बीते 6 साल से कहां गायब है? मोदी भाजपा की सरकार लोकतंत्र की हत्या कर रही है। काले धन की थैलियों से खरीदफरोख्त कर निर्वाचित राज्य सरकारों को अस्थिर किया जा रहा है। देश के नवरत्न महारत्न  मिनिरत्न सरकारी कंपनियों को बेचा जा रहा है। रेलवे स्टेशन लाल किला एयरपोर्ट हवाई अड्डे विमानन सेवा भेल गेल सहित अनेक सरकारी कम्पनियों संपत्तियों को बेचा जा रहा है। अभिव्यक्ति की आजादी का हनन किया जा रहा है मीडिया पर दबाव बनाया जा रहा है सवैधानिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। ऐसे में तथाकथित स्वयम्भू लोकतंत्र के सेनानी क्या मात्र  पेंशन लेने के लिए प्रगट होते रहेंगें? मोदी सरकार के लोकतंत्र विरोधी कृत्यों के खिलाफ आवाज उठाने से ये तथाकथित सेनानी क्यों डर रहे है? मोदी भाजपा के लोकतंत्र विरोधी कृत्यों को सफल बनाने में तथाकथित सेनानी क्यों जुटे हैं?

उन्होंने कहा कि खुद को लोकतंत्र के रक्षक होने की दुहाई देने वाले तथाकथित लोकतंत्र के सेनानियों के चेहरे से नकाब उतर चुका है। जनता इनको पहचान चुकी है। असल मे ये लोकतंत्र के सेनानी नही बल्कि आरएसएस भाजपा के एजेंट है। जो चुनाव के दौरान भाजपा को लाभ पहुँचाने जनता के बीच भ्रम का मायाजाल बुनते है। मनगढ़ंत और झूठी कहानियां गढ़कर भाजपा से मिलने वाले नोट के बदले वोट दिलाते हैं।

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