जबलपुर

पिछले दो वर्षों से नहीं हुआ नहर के कटाव का जीर्णोद्धार

बालाघाट
परसवाड़ा तहसील मुख्यालय के अन्तर्गत ग्राम पंचायत झिरिया का प्रत्येक किसान खेती पर आश्रित है। जहां किसानों को अपनी फसल बचाने के लिये काफी संघर्ष करना पड़ता है। वर्तमान में पिछले कुछ दिनो से बारिश न होने के कारण किसानो की फसलो पर आफत की आग बरस रही है। जहां पानी के अभाव में धान के रोपे सूखने लगे है और किसानो के चेहरे पर परेशानी की परत जमने लगी है। किसान अपनी फसल बचाने हर संभव प्रयासरत् है। फिलहाल किसान बारिश से उम्मीद छोड, नहर के पानी पर आश्रित हो चुके है। लेकिन नहरों से भी पानी किसानों के खेतों तक नहीं पहुच पा रहा है। परसवाडा तहसील के ग्राम पंचायत झिरिया में नहर अपना अस्तित्व खो चुकी है जहां किसानों ने पानी की समुचित व्यवस्था को लेकर नहर के कटान को दुरूस्त किये जाने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि परसवाड़ा क्षेत्र मे पिछले दो सप्ताह से सही मायने में बारिश नहीं हुई। जहां बारिश नही होने के चलते सभी किसान अपनी फसल को लेकर परेशान है। ऐसी परिस्थिति में किसान जलगांव बांध से होकर आने वाले नहर के पानी पर ही अपनी उम्मीद टिकाये हुए है। लेकिन देखने में आया है कि जो नहर जलगांव जलाशय से होकर आती है वह बघोली, झिरिया, पटोरा आदि ग्रामो मे कई स्थानों से कट चुकी है, जिस कारण क्षेत्र के लगभग 4 सैंकड़ा किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। महज 3-4 किमी की दूरी में ही किसानो को पानी उपलब्ध हो पा रहा है। बाकि दूरस्थ खेतो में पानी न पहुंचने के कारण किसानों के माथे पर चिंता की लकीरे साफ जाहिर होने लगी है। अब किसान परेशान होकर सिंचाई विभाग पर निशाना साधे हुए है तथा मांग कर रहे है कि जल्द से जल्द नहर के कटाव को दुरूस्त करें।

बताया जा रहा है कि पिछले दो वर्षों से सिंचाई विभाग द्वारा नहर के कटाव का मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है। जिस कारण जलगांव जलाशय का पानी किसानों के खेतों तक पहुंचने में असमर्थ है। जलाशय का लगभग 80 प्रतिशत पानी जंगलों में बह रहा है और किसानों के खेत सूखे का दंश भोग रहे है। ऐसी परिस्थिति में धान के रोपे भी चौपट होने की कगार पर है। किसानो द्वारा सिंचाई विभाग के कर्मचारियों को शिकायत भी की गई है परन्तु कर्मचारियों द्वारा भी विभाग के मद में मरम्मत के लिए राशि नहीं होने की दुहाई देते है, जबकि ग्राम झिरिया के किसानो से सख्ती के साथ पानी की राशि की  वसूली जाती है। विभाग के आला अधिकारी आज कल कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड रहे है। इस तरह की विकट परिस्थिति पैदा होने से फसलों के प्रति चिन्तित किसान अब आक्रोशित होकर चेतावनी भरे लहजे मे दावा कर रहे है कि समय के पूर्व नहर के कटाव का मरम्मत कार्य नहीं कराया गया तो वे सड़क पर उतरने का विवश होगें, जिसका जिम्मेदार सिंचाई विभाग होगा।

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