भोपाल

आदिवासियों के हित में नए सिरे से होगा सर्वे, पूर्व मुख्यमंत्री को पलटने जा रहे शिवराज

भोपाल
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कार्यकाल में प्रदेश के एक लाख 60 हजार आदिवासियों के वन भूमि के अधिकार को निरस्त कर दिया गया था। अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस फैसले को पलटने जा रहे है। वन भूमि पर काबिज इन आदिवासियों को उनका जमीन का हक देने के लिए अब फिर से इनके मामलों की जांच की जाएगी और जांच के बाद सभी वास्तविक हकदारों को इनका हक प्रदान किया जाएगा।

कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में वनाधिकार पट्टा वितरण के लिए अभियान चला था। इसमें एक लाख साठ हजार आदिवासियों को अतिक्रामक मानते हुए इन्हें वनाधिकार पट्टे से वंचित कर दिया गया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर वन भूमि पर बर्षो से काबिज इन आदिवासियों की सुध ली है। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल को कहा है कि पूरे प्रदेशभर में वन भूमि पर काबिज आदिवासियों के मामलों की समीक्षा करवाएं। जिन जिलों में ज्यादा मामले है वहां प्रमुख सचिव और एपीसीसीएफ स्तर के अधिकारी साथ में दौरा करे और मामलों की समीक्षा करें।

समीक्षा के बाद रिजेक्ट किए गए एक लाख 60 हजार परिवारों से वर्ष 2005 में उनके उस भूमि पर काबिज होंने के दावे लिए जाएं और उनकी जांच की जाए। यदि वे उस समय वन भूमि पर काबिज थे तो उन्हें उसका हक देते हुए वनाधिकार पट्टे वितरित किए जाएं।

Related Articles

Close