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आतंकियों की साजिश के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे अमरनाथ मंदिर

श्रीनगर
लद्दाख में चीन के खिलाफ सेना की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह शनिवार को अमरनाथ के दर्शन किए और पूजा भी की। उनके साथ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे भी मौजूद थे। रक्षा मंत्री यहां श्रद्धालुओं के लिए की गई तैयारियों का जायजा भी लेंगे। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की यह यात्रा इसलिए भी अहम है कि एक दिन पहले ही सेना ने कहा है कि आतंकी अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। अमरनाथ यात्रा 21 जुलाई को शुरू होने जा रही है और 3 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन खत्म होगी। कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से इस बार बेहद सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को दर्शन का मौका दिया जाएगा। भारत और चीन के बीच 5 मई को शुरू हुए टकराव के बाद रक्षा मंत्री पहली बार शुक्रवार को लद्दाख पहुंचे। रक्षा मंत्री लद्दाख से श्रीनगर गए जहां वे पाकिस्तान के साथ लगने वाली नियंत्रण रेखा (एलओसी) की स्थिति की समीक्षा करेंगे।  

अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने के लिए आतंकवादियों के साजिश रचने के बारे में जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों को खुफिया सूचना मिली है। थल सेना के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वार्षिक यात्रा को निर्बाध सुनिश्चित करने के लिए पूरी व्यवस्था की गई है और संसाधन लगाए गए हैं। अधिकारी ने कहा कि शुक्रवार की मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के एक स्वयंभू कमांडर सहित तीन आतंकवादियों का मारा जाना एक मुंहतोड़ जवाब है। यह 21 जुलाई को यात्रा शुरू होने से महज चार दिन पहले हुआ। टू सेक्टर के कमांडर, ब्रिगेडियर विवेक सिंह ठाकुर ने दक्षिण कश्मीर में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''इस बारे में खुफिया सूचना है कि आतंकवादी यात्रा को निशाना बनाने की अपनी पूरी कोशिश करेंगे, लेकिन इसके निर्बाध एवं शांतिपूवर्क संपन्न होने की व्यवस्था की गई है तथा संसाधन लगाए गए हैं।'' उन्होंने कहा, ''हम अमरनाथ यात्रा बगैर किसी विघ्न के शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिये प्रतिबद्ध हैं और सुरक्षा स्थिति नियंत्रण में बनी रहेगी।'' ब्रिगेडियर ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग 44 के एक हिस्से का उपयोग यात्री करेंगे, जो संदेनशनील बना रहेगा। उन्होंने कहा, ''यह हिस्सा थोड़ा संवेदनशील है। यात्री सोनमर्ग (गंदेरबल) तक जाने के लिए इस रास्ते का उपयोग करेंगे और यह (बलटाल) एकमात्र मार्ग है जो अमरनाथ गुफा जाने के लिये चालू रहेगा। 
 

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