राजनीति

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी का इस्तीफा

 श्रीनगर
ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने एक ऑडियो संदेश जारी कर इस्तीफा दिया है। 90 वर्षीय गिलानी के इस्तीफा देने को लेकर अब तमाम तरह की अटकलें भी लग रही हैं। बताया जा रहा है कि गिलानी ने हुर्रियत के अंदर बने दो गुटों के चलते इस्तीफा दिया है। पिछले एक साल से हुर्रियत के अंदर काफी गर्म माहौल चल रहा था। ऐसे में अब गिलानी का इस्तीफा देना कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि इस्तीफे को लेकर गिलानी किसी से बात नहीं कर रहे हैं।

कौन हैं सैयद अली शाह गिलानी
गिलानी इस समय श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में रहते हैं। वह मूल रूप से सोपोर जिले के रहने वाले हैं। उनका जन्म 29 सितंबर 1929 को हुआ था। उन्होंने कॉलेज तक पढ़ाई पाकिस्तान के लाहौर से की। वह तीन बार सोपोर से विधायक रहे हैं।

हमेशा भारत विरोधी रहे हैं गिलानी
सैयद गिलानी की सोच हमेशा भारत विरोधी रही है। वह आज भी कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानते हैं। गिलानी ने हमेशा से कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग की। आतंकियों के साथ काम, पाकिस्तान प्रेम, पाकिस्तान से मिलते पैसे, कश्मीर को बंद करने जैसे कई मामलों से वह हमेशा सुर्खियों में रहे हैं। हमेशा भारत विरोधी नारे लगाते हैं।

1990 में हुआ हुर्रियत का गठन, गिलानी पर दर्ज कई मामले
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का गठन 90 के दशक में हुआ था। इस संगठन के गठन के पीछे मूल उद्देश्य आतंकी हिंसा और अलगाववादी सियासत को संयुक्त रूप से एक राजनीतिक मंच देना था। गिलानी पर कई मामले दर्ज हैं। उनका पासपोर्ट भी रद्द किया जा चुका है। साल 2010 में उनके एक भारत विरोधी बयान पर काफी बवाल हुआ था। इसके बाद हवाला फंडिग, सीमा पार आतंकी कमांडरों से पैसे लेकर उसे आगे कश्मीर में आग भडंकाने के लिए इस्तेमाल करने में भी उनकी भूमिका रही है। एनआईए, ईडी ने इन मामलों की जांच की है जिसमें गिलानी के दामाद से भी पूछताछ हुई थी।

हाफिज सईद से पैसों के लेनदेन पर हुई है पूछताछ
गिलानी के करीबी लोगों से पूछताछ करने के बाद एक टीम ने गिलानी से भी पूछताछ की थी। उस समय गिलानी, शबीर शाह, यासीन मलिक, आसिया अंद्राबी समेत कई अलगाववादी नेताओं पर हाफिज सईद से पैसे लेकर आतंकवाद को बढ़ाने की कार्रवाई की गई। गिलानी साल 2010 से घर में ही नजरबंद हैं। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि वह अक्सर बाहर निकलकर भड़काऊ भाषण देते रहते थे।

2014 में मौत की अफवाह फैली
गिलानी की मौत को लेकर भी कई बार अफवाह फैल चुकी है। साल 2014 में गिलानी की मौत की अफवाह पर कश्मीर में इंटरनेट सर्विस को सस्पेंड करना पड़ा था।

चुनावों का बॉयकॉट किया था
गिलानी ने वर्ष 2014 के चुनावों में बॉयकॉट किया था। उन्होंने अपने मैसेज में कश्मीर की जनता को कहा था कि चुनावों में भाग ना ले। जिसके बाद आतंकियों ने ऐसे कई नागरिकों की हत्या की जो चुनावों में भाग ले रहे थे। हालांकि कश्मीर की जनता ने इसका उल्टा किया और राज्य में 65 प्रतिशत मतदान हुआ था। राज्य में 25 सालों बाद ऐसा हुआ था।

एक बयान पर कश्मीर होता है बंद
गिलानी के एक बयान पर कश्मीर बंद हो जाता है। अधिकतर आतंकियों के मरने के बाद गिलानी की तरफ से बंद की कॉल दी जाती है। अभी तक उनके कहने पर कई बार कश्मीर पूरी तरह से बंद हो चुका है।

एक साल से कोई बयान नहीं आया
गिलानी पिछले एक साल से बिल्कुल चुप हैं। इसका कारण उनका बीमार रहना बताया जाता है। असल में वह हुर्रियत के अंदर बने दो गुटों की राजनीति के कारण तंग थे। इसलिए 370 हटाए जाने के बाद भी उन्होंने कश्मीर को लेकर कोई बयान, बंद नहीं किया था। इस बात को लेकर हुर्रियत के बाकी नेताओं ने भी बाते करना शुरू कर दिया था।

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